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Coronavirus

आज तक का मॉर्फ्ड स्क्रीनशॉट भ्रामक दावे के साथ किया जा रहा है शेयर, पढ़ें वायरल दावे का सच 

चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना वायरस अब तक दुनिया के कई देशों में फैल चुका है, जिसमें भारत भी शामिल है। भारत में यह संक्रमण सबसे पहले केरल में सामने आया था और शुरूआत में केरल में तीन लोगों के संक्रमित होने का पता चला था। भारत में यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में शेयरचैट पर हिंदी न्यूज़ चैनल आजतक की ब्रैकिंग न्यूज़ का स्क्रीन शॉट वायरल हो रहा है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि तुलसी पीने से नहीं होगा कोरोना का असर, WHO विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा यह सूचना जारी की गई है।  

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Claim: तुसली पीने से नहीं होगा कोरोना का असर। 

जानिए क्या है वायरल दावा:

चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना वायरस अब तक दुनिया के कई देशों में फैल चुका है, जिसमें भारत भी शामिल है। भारत में यह संक्रमण सबसे पहले केरल में सामने आया था और शुरूआत में केरल में तीन लोगों के संक्रमित होने का पता चला था। भारत में यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में शेयरचैट पर हिंदी न्यूज़ चैनल आजतक की ब्रैकिंग न्यूज़ का स्क्रीन शॉट वायरल हो रहा है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि तुलसी पीने से नहीं होगा कोरोना का असर, WHO विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा यह सूचना जारी की गई है।     

Verification

महामारी कोरोना वायरस (COVID-19) अभी तक 117 से अधिक देशों में अपने पैर पसार चुका है। कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या अब 1 लाख 16 हज़ार से अधिक हो गई है। लेकिन इनमें सबसे अधिक मामले चीन से ही सामने आए हैं। वहीं COVID-19 से मरने वालों की संख्या अब चार हज़ार से अधिक हो गई है। भारत में महामारी से संक्रमित लोगों का आंकड़ा 74 हो गया है। वहीं वायरस के प्रकोप को सीमित करने के लिए भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए विदेशियों के आने पर 15 अप्रैल तक रोक लगा दी है। ऐसे में सोशल मीडिया पर इस महामारी से संबंधित अलग-अलग दावे वायरल हो रहे हैं। शेयरचैट पर हिंदी न्यूज़ चैनल आजतक की ब्रैकिंग न्यूज़ का स्क्रीन शॉट वायरल हो रहा है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि तुलसी पीने से कोरोना का असर नहीं होगा, WHO विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा यह सूचना जारी की गई है।     

 

वायरल दावे को फेसबुक पर कई यूजर्स द्वारा शेयर किया जा रहा है जिसे यहां और यहां देखा जा सकता है

शेयरचैट पर भी वायरल दावे को शेयर किया जा रहा है। 

कुछ कीवर्ड्स की मदद से हमने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावे को खंगाला। जांच के दौरान सबसे पहले हमने WHO की वेबसाइट को खोजा, जहां हमें वायरल दावे से संबंधित कोई जानकारी नहीं मिली। जिसको आप नीचे देख सकते हैं।

वायरल दावे की तह तक जाने के लिए हमने विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी की गई एडवाइजरी को भी पढ़ा। जहां हमें वायरल दावे से संबंधित कोई जानकारी नहीं मिली। WHO द्वारा बताया गया है कि कोरोनावायरस को ठीक करने के लिए अभी तक कोई टीका या दवाई नहीं बनी है, डॉक्टर और वैज्ञानिक इस पर अभी भी रिसर्च कर रहें हैं। इस खोज में यह साबित होता है कि वायरल स्क्रीनशॉट में किए जा रहे दावे में कोई सच्चाई नहीं है। 

अब हमने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हिंदी न्यूज़ चैनल आज तक की ब्रैकिंग न्यूज़ के स्क्रीनशॉट को खंगाला। पड़ताल के दौरान हमने आज तक की वेबसाइट को खंगाला जहां हमें इससे संबंधित कोई लेख नहीं मिला। 

वायरल स्क्रीनशॉट को खंगालने के लिए हमने AAJ TAK की ब्रैकिंग देखी। जहां हमें सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशॉट और असली ब्रैकिंग फॉरमेट में कई अंतर दिखे, जिसको आप नीचे देख सकते हैं।

 

   

पहला अंतर- वायरल स्क्रीनशॉट में सबसे बड़ी गलती कोरोना की स्पैलिंग गलत लिखी गई है। कोरोना को (कोरोनो) लिखा गया है।  

दूसरा अंतर- दोनों ब्रैकिंग में इस्तेमाल किए गए लाल रंग में भी अंतर को साफ देखा जा सकता है।

तीसरी अंतर- दोनों ब्रैकिंग फ़ॉर्मेट का फॉन्ट साइज और फॉन्ट स्टाइल अलग-अलग है। 

हमारी पड़ताल में साफ होता है कि फेसबुक और शेयरचैट पर हिंदी न्यूज़ चैनल आज तक की मॉर्फ्ड  स्क्रीनशॉट को भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। 

Tools Used

  • Google Keywords Search 

Result: False 

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क्या कोरोना से होने वाली मौत पर आश्रितों को पीएम सुरक्षा बीमा योजना के तहत मिलेंगे 2 लाख रुपये?

दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों की कोरोना वायरस से मौत हुई है उनके परिवार को मोदी सरकार की दो योजनाओं से 2 लाख रूपए मिल सकते हैं।

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दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों की कोरोना वायरस से मौत हुई है उनके परिवार को मोदी सरकार की दो योजनाओं से 2 लाख रूपए मिल सकते हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक मैसेज बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों की कोरोना वायरस से मौत हुई है उनके परिवार को मोदी सरकार की दो योजनाओं से 2 लाख रूपए मिल सकते हैं।

वायरल मैसेज का हिंदी अनुवाद-

यदि आपके किसी रिश्तेदार या दोस्त की कोविड-19 के कारण मौत हो जाती है तो बैंक से उनकी बैंक स्टेटमेंट चेक करें या फिर 01-04 से लेकर 31-03 की तारीख तक पासबुक में एंट्री चेक करें। अगर बैंक स्टेटमेंट में अप्रैल 2019 से मार्च 2020 के बीच 12 रूपए प्रति माह या 330 रूपए प्रति माह की किश्त कटी है तो परिवार को सरकारी बीमा योजना के जरिए 2 लाख रूपए मिलेंगे। यह राशि ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’ (PMJJBY) या फिर प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) के तहत मिलेगी।

वायरल पोस्ट के आर्काइव वर्ज़न को यहां देखा जा सकता है।

फेसबुक पर इस पोस्ट को अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

Fact Check/Verification

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किए जा रहे दावे की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल शुरू किया। सबसे पहले हमने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) की आधिकारिक वेबसाइट को खंगाला।

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर हमने पाया कि इस योजना के तहत हर मरीने 330 रूपए की किश्त जमा करनी होती है। यह बीमा एक साल का होता है। इस बीमा योजना के तहत अगर किसी भी बीमा धारक की मौत हो जाती है तो उसके उत्तराधिकारी को 2 लाख रूपए मिलेंगे।

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के नियम और शर्तों में कहा गया है कि किसी भी कारण से मौत होने पर राशि का प्रावधान है। इससे यह साफ होता है कि अगर किसी भी बीमा वाले व्यक्ति की कोरोना के कारण मौत होती है तो उसे भी प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत दो लाख रूपए मिलेंगे।  

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) में एक्सीडेंट से मौत होना या फिर एक्सीडेंट से विकलांग होने पर क्लेम की राशि मिलती है। इस बीमा में सिर्फ 12 रूपए साल कि किश्त देनी होती है। केवल 18 से 70 वर्ष के लोग ही यह बीमा करा सकते हैं।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में कहीं भी ऐसा नहीं लिखा है कि कोरोना वायरस के कारण होने वाली मौत पर क्लेम मिलने का कोई प्रावधान है। इस बीमा के अंदर केवल एक्सीडेंटल डेथ वाले लागों को ही क्लेम मिलता है।

पड़ताल को जारी रखते हुए अब हमने यह जानने की कोशिश शुरू किया कि क्या कोविड-19 एक्सीडेंटल डेथ माना जाएगा? वायरल दावे की तह तक जाने के लिए हमने Insurance Regulatory and Development Authority of India की आधिकारिक वेबसाइट को खंगाला। खोज के दौरान हमने पाया कि केवल चोट लगने वाली मौत को एक्सीडेंटल डेथ माना जाता था। एक्सीडेंटल डेथ में सभी चोटें नहीं आती है केवल वो चोट आती हैं जिसमें सर्जरी की जरूरत पड़ती है। इससे यह साफ होता है कि कोरोना वायरस से होने वाली मौत को एक्सीडेंटल डेथ नहीं माना जाएगा।

Conclusion

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में कोरोना वायरस से होने वाली मौत को एक्सीडेंटल डेथ नहीं माना जाएगा। पड़ताल में हमने यह पाया कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में कोरोना वायरस से होने वाली मौत पर परिवार को बीमा राशि मिल सकती है। लोगों को भ्रमित करने के लिए सोशल मीडिया पर भ्रामक दावा किया जा रहा है।


Result: Misleading  


Our Sources

Pradhan Mantri Jeevan Jyoti Yojana https://jansuraksha.gov.in/Files/PMJJBY/English/About-PMJJBY.pdf?ref=inbound_article

Pradhan Mantri Suraksha Bima Yojana https://jansuraksha.gov.in/Files/PMSBY/English/About-PMSBY.pdf?ref=inbound_article


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चीन में नए वायरस से नहीं बल्कि बैक्टीरिया से हो रही है Brucellosis नाम की बीमारी

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि चीन की लैब से एक नया वायरस लीक हुआ है, जिससे लोगों में ब्रूसीलोसिस नाम की बीमारी फ़ैल रही है। दावा है कि इस वायरस से चीन में अब तक 3200 से ज्यादा लोग संक्रमित हैं।

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सोशल मीडिया पर एक खबर खूब वायरल हो रही है। खबर में दावा किया जा रहा है कि चीन की लैब से कोरोनावायरस के बाद अब एक और नया वायरस लीक हुआ है, जिसका नाम ब्रूसीलोसिस है, बताया जा रहा है कि इस वायरस से अब तक सैकड़ों लोग संक्रमित हो चुके हैं।

सोशल मीडिया के अन्य यूज़र्स ने भी चीन की लैब से एक नए वायरस के लीक होने की जानकारी दी है।

ब्रूसीलोसिस चीन वायरस बीमारी

इसी क्रम में भाजपा पार्टी के प्रवक्ता व विधायक प्रत्याशी तिजेन्दर पाल सिंह बग्गा ने भी एक नए वायरस की जानकारी देते हुए एक खबर का लिंक शेयर किया है।

खबर का आर्काइव लिंक यहाँ देखें।

Fact Check / Verification

चीन के वुहान शहर से फैले कोरोनावायरस ने अपने प्रकोप से पूरी दुनिया में भारी तबाही मचाई है, इस वायरस के सामने भारत जैसे तमाम विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था चित हो गयी है तो अमेरिका, रूस तथा कई विकसित देशों का भी बुरा हाल है।

अब तक पूरी दुनिया में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या तीन करोड़ के पार हैं वहीं इसके संक्रमण से मरने वालो की संख्या करीब नौ लाख के पार हो चुकी है।

इसी बीच सोशल मीडिया पर चीन की लैब से एक नए वायरस के लीक होने की खबर वायरल हो रही है। इस खबर में नए वायरस को ब्रूसीलोसिस बताया जा रहा है। ख़बर के मुताबिक इस वायरस से अब तक चीन में 3200 से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। इस दावे का सच जानने के लिए हमने अपनी पड़ताल आरम्भ की।

पड़ताल के दौरान हमने सबसे पहले गूगल पर चीन में किसी नए वायरस के लीक होने की खबर को खंगालना शुरू किया। जहां हमें Zee News की वेबसाइट पर 18 सितंबर को प्रकाशित एक लेख मिला। इस लेख में एक नई बीमारी का जिक्र किया गया है।

ब्रूसीलोसिस चीन वायरस बीमारी

लेख के मुताबिक चीन में एक नई बीमारी आयी है, जिससे अब तक 3200 से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। चीन के लोगों ने इस बीमारी को ब्रूसीलोसिस नाम दिया है।

प्राप्त लेख में इस बीमारी को बैक्टीरियल बीमारी बताया जा रहा है, यानि यह बीमारी वायरस से नहीं बल्कि बैक्टीरिया से हुई है।

इस बीमारी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने गूगल पर रिसर्च किया। इस दौरान हमें अमर उजाला की वेबसाइट पर इस नई बीमारी पर छपा एक लेख मिला।

उक्त लेख में मुताबिक ब्रूसीलोसिस एक बैक्टीरिया जनित बीमारी है जो आम तौर पर भेड़-बकरी,गाय, कुत्तों और सुअर को संक्रमित करती है। हालांकि इंसानों में भी इसका संक्रमण हो सकता है यदि इंसान संक्रमित जानवर के संपर्क में आएं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, ये बीमारी दुनिया के कई देशों में रिपोर्ट होती रही है। इसका इलाज भी संभव है।

ब्रूसीलोसिस नामक बीमारी चीन में फैली कैसे?

यह बीमारी लोगों में फैली कैसे इसकी जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने गूगल पर कुछ संबंधित कीवर्ड्स की सहायता ली। जिसे बाद हमें CNN की वेबसाइट पर हाल ही में छपा एक लेख मिला।

ब्रूसीलोसिस चीन वायरस बीमारी

लेख में बताया गया है कि यह बैक्टीरिया एक इंसान से दूसरे इंसान में बहुत कम फैलता है, आमतौर पर यह बैक्टीरिया संक्रमित जानवर के संपर्क में आने पर ही फैलता है।

लेख में जानकारी दी गयी है कि लानझोऊ बायोलॉजिकल फैक्ट्री में ‘ब्रूसेला वैक्सीन’ को बनाने के लिए एक्सपायर्ड सैनिटाइज़र और डिसइंफेक्टेंट्स का इस्तेमाल किया गया था। इससे दूषित बेकार गैस में एरोसोल निर्मित हो गया जिसमें बैक्टीरिया थे। जिसके बाद हवा से यह बैक्टीरिया इंसानों में फ़ैल गया।

पड़ताल के दौरान हमें NCBI की सरकारी वेबसाइट पर जून साल 2005 को छपा एक लेख मिला। जहां ब्रूसीलोसिस नाम की बीमारी का जिक्र किया गया है। प्राप्त इस लेख से जानकारी मिली कि यह बीमारी विश्व में नयी नहीं है।

इसके अलावा हमें भारत सरकार की वेबसाइट पर भी इस बीमारी की जानकारी मिली। भारत सरकार की वेबसाइट पर 26 अप्रैल साल 2018 को छपे एक लेख में ब्रूसीलोसिस नाम की बीमारी के बारे में जानकारी दी गयी है।

ब्रूसीलोसिस चीन वायरस बीमारी


Conclusion

वायरल दावे की पड़ताल में पता चला कि ब्रूसीलोसिस नाम की बीमारी न तो वायरस से फैलती है और न ही यह कोई नयी बीमारी है। असल में यह एक बैक्टीरियल बीमारी है जो बैक्टीरिया के जरिये लोगों में फैलती है। यह बीमारी एक इंसान से दूसरे इंसान में कम फैलती है। आमतौर पर इस बैक्टीरिया का संचार संक्रमित जानवर से होता है। इसके अलावा यह बीमारी कई वर्षों पहले से ही इंसानों के बीच मौजूद है।


Result: Misleading

Our Sources

https://edition.cnn.com/2020/09/17/asia/china-brucellosis-outbreak-intl-hnk/index.html

https://zeenews.india.com/hindi/world/new-disease-brucellosis-from-china-among-corona-so-many-people-infected-know-symptoms/750082

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/15845228/


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क्या इटली के डॉक्टरों ने कोरोना वायरस को बताया बैक्टीरिया? सोशल मीडिया पर फेक दावा वायरल है।

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर ऑटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि यह एक ग्लोबल घोटाला है।

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इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर अटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है।

व्हाट्सएप पर एक मैसेज बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर ऑटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि एक ग्लोबल घोटाला है। लोग असल में “ऐमप्लीफाईड ग्लोबल 5G इलैक्ट्रोमैगनेटिक रेडिएशन (ज़हर)” के कारण मर रहे हैं।

दावा किया गया है कि इटली ने इस वायरस को हराया है और कहा है कि “फैलीआ-इंट्रावासकूलर कोगूलेशन (थ्रोम्बोसिस) के अलावा और कुछ नहीं है। इसका मुकाबला करने का तरीका आर्थात इलाज कुछ इस तरह बताया गया है।

ऐंटीबायोटिकस (Antibiotics tablets}

ऐंटी-इंनफ्लेमटरी (Anti-inflammatory) और

ऐंटीकोआगूलैटस (Aspirin) को लेने से यह ठीक हो जाता है।

इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करने की अपील की गई है।

नीचे देखा जा सकता है कि हमारे आधिकारिक नंबर पर यूज़र द्वारा वायरल दावे की सत्यता जानने की अपील की गई थी।”

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर अटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि यह एक ग्लोबल घोटाला है।

ट्विटर पर भी वायरल दावे को अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

Fact Check/Verification

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल शुरू किया। हमने हर दावे को क्रमशः खोजना शुरू किया।

पहला दावा

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर ऑटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि बैक्टीरिया है। जिसकी वजह से खून के थक्के जम जाते हैं और मरीज की मौत हो जाती है।

पड़ताल के दौरान हमें The Lancet की एक रिपोर्ट मिली। इसके मुताबिक कोरोना वायरस में रेस्पिरेटरी फेल्योर को मौत का मुख्य कारण माना गया है। इसकी कारण से नसों में खून के थक्के जम जाते हैं और मरीज की मौत हो जाती है। हमें इस तरह की भी कोई जानकारी नहीं मिली कि कोविड-19 वायरस नहीं, बैक्टीरिया है।

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर अटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि यह एक ग्लोबल घोटाला है।

दूसरा दावा

WHO का कानून कोविड-19 से मरने वाले लोगों के शरीर का पोस्टमॉर्टम करने की अनुमति नहीं देता है। लेकिन इटली में कोविड मृत शरीर का पोस्टमॉर्टम किया और पाया कि यह वायरस नहीं बल्कि बैक्टीरिया है।

इस दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने World Health Organization की आधिकारिक वेबसाइट को खंगाला। पड़ताल के दौरान हमने पाया कि डब्लूएचओ ने ऐसा कोई कानून नहीं बनाया है जो कोरोना वायरस से मरने वाले के शरीर का पोस्टमॉर्टम या रिसर्च करने से रोकता हो।

पड़ताल के दौरान हमें डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस मिली। जिसमें बताया गया है कि कोरोना वायरस से मरने वालों को इस तरह से उपचार करना चाहिए जिससे बाकी लोगों को सुरक्षित किया जा सके और आगे किसी में संक्रमण फैलने से रोका जा सके।

अधिक खोजने पर हमें WHO द्वारा Myth Buster का सेक्शन मिला जिसमें बताया गया है कि कोरोना वायरस एक वायरस है, कोई बैक्टीरिया नहीं।

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर अटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि यह एक ग्लोबल घोटाला है।

तीसरा दावा

इटली के वैज्ञानिकों ने पाया कि इसका इलाज एंटीबायोटिक्स, एंटी इन्फ्लेमेटरी या एस्प्रिन से किया जा सकता है।

WHO की आधिकारिक वेबसाइट खंगालने पर हमने पाया कि वह पहले ही साफ कर चुका है कि कोरोना वायरस एक वायरस है और इसका इलाज किसी भी तरह की एंटीबायोटिक्स से नहीं किया जा सकता है।

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर अटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि यह एक ग्लोबल घोटाला है।

अधिक खोजने पर हमें 24 अगस्त, 2020 को Reuters द्वारा प्रकाशित की गई मीडिया रिपोर्ट मिली। इसके मुताबिक इटली ने कोरोना वायरस वैक्सीन पर ह्यूमन ट्रायल शुरू कर दिया है। अब सोचने वाली बात यह है कि अगर वहां कोरोना वायरस का इलाज एंटीबायोटिक्स से हो रहा होता तो वो वैक्सीन का परीक्षण क्यों करता।

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर अटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि यह एक ग्लोबल घोटाला है।

चौथा दावा

लोग कोरोना वायरस से नहीं बल्कि 5G इलेक्ट्रोमैगनेटिक रेडिएशन ज़हर के कारण मर रहे हैं।

पड़ताल के दौरान हमें अप्रैल, 2020 में ET Telecom द्वारा प्रकाशित की गई एक रिपोर्ट मिली। इसके मुताबिक कोरोना वायरस के लिए हाई स्पीड ब्राडबैंड 5G जिम्मेदार नहीं है। इन दोनों का आपस में कोई तकनीकी आधार नहीं है।

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर अटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि यह एक ग्लोबल घोटाला है।

कुछ अलग-अलग कीवर्ड्स की मदद से गूगल खंगालने पर हमें वायरल दावे से संबंधित कोई मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली।  

Conclusion

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि इटली के डॉक्टरों के नाम से वायरल हो रहा दावा फर्ज़ी है। पड़ताल में हमने पाया कि इटली ने कोविड-19 से मृत शरीर पर ऑटोप्सी (Postmortem) नहीं किया है।


Result: False


Our Sources

World Health Organization https://www.who.int/emergencies/diseases/novel-coronavirus-2019/advice-for-public/myth-busters#virus

Reuters https://www.reuters.com/article/us-health-coronavirus-italy/italy-begins-testing-potential-covid-19-vaccine-on-volunteers-idUSKBN25K17F?ref=inbound_article

ET Telecom https://telecom.economictimes.indiatimes.com/news/theory-of-5g-spreading-covid-19-a-hoax-that-has-no-technical-basis-un-ict-agency/75318703


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