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Coronavirus

क्या टाटा समूह ने लांच की घर बैठे कोरोना के इलाज की किट?

व्हाट्सऐप ग्रुप्स में एक फॉरवर्ड शेयर किया जा रहा है जिसे टाटा हेल्थ के द्वारा जारी किया गया बताया जा रहा है। वायरल संदेश में घर बैठे कोरोना वायरस के इलाज से सम्बंधित तमाम दावे किये गए हैं।

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व्हाट्सऐप ग्रुप्स में एक फॉरवर्ड शेयर किया जा रहा है जिसे टाटा हेल्थ के द्वारा जारी किया गया बताया जा रहा है। वायरल संदेश में घर बैठे कोरोना वायरस के इलाज से सम्बंधित तमाम दावे किये गए हैं। व्हाट्सऐप ग्रुप्स और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा दावा इस प्रकार है:

Covid Medical kit Required at home:

1. Paracetamol

2. Betadine for mouthwash and gargle

3. Vitamin C and D3

5. B complex

6. Vapour+ capsules for steam

7. Oximeter

8. Oxygen cylinder (for emergency only)

9. arogya Setu app

10.Breathing Exercises

Covid Three stages:

1. Covid only in nose – recovery  time is half a day. (Steam inhaling), vitamin C. Usually no fever. Asymptomatic.

2. Covid in throat – sore throat, recovery time 1 day (hot water gargle, warm water to drink, if temp then paracetamol. Vitamin C, Bcomplex. If severe than antibiotic.

3. Covid in lungs- coughing and breathlessness 4 to 5 days. (Vitamin C, B complex, hot water gargle, oximeter, paracetamol, cylinder if severe, lot of liquid required, deep breathing exercise.

Stage when to approach hospital:

Monitor the oxygen level. If it goes near 43 (normal 98-100) then you need oxygen cylinder. If available at home, then no hospital else admit.

Stay healthy, Stay Safe!

 Please fwd to your contacts in India. You never know who it may help.

Tata Group has started good initiative, they are providing free doctors consultation online through chats. This facility is started for you so that you need not to go out for doctors and you will be safe at home.

Below is the link, I reqest everyone to take benefit of this facility.

Tata Digital Health

Tata Digital Health

हिंदी अनुवाद: 

कोरोना वायरस से बचाव के लिए होम किट:

1. पैरासिटामॉल 

2. माउथ वाश और कुल्ला करने के लिए बेटाडीन

3. विटामिन सी और डी3 

4. बी काम्प्लेक्स

5. भाप और भाप के लिए कैप्सूल्स

6. ऑक्सीमीटर

7. ऑक्सीजन सिलेंडर (केवल आपातकालीन प्रयोग के लिए)

8. आरोग्य सेतु ऐप

9. स्वसन अभ्यास

कोरोना वायरस के तीन चरण

1. केवल नाक में कोरोना वायरस- आधे दिन में रिकवरी (भाप लेने से), विटामिन सी, सामान्यतः कोई बुखार नहीं, कोई लक्षण नहीं.

2. गले में कोरोना वायरस- गले में खरास, 1 दिन में रिकवरी (गर्म पानी पीने और गलाला करने से), अगर बुखार है तो पैरासीटामॉल. (विटामिन सी, बी काम्प्लेक्स, गर्म पानी से गलाला, गर्म पानी पीना, अगर बुखार है तो पैरासीटामॉल. विटामिन सी, बी काम्प्लेक्स. अगर गंभीर हैं तो एंटीबायोटिक.

3. फेंफड़े में कोरोना वायरस- खांसी और सांस लेने में तकलीफ, 4 से 5 दिन. ( विटामिन सी, बी काम्प्लेक्स, गर्म पानी से गलाला, ऑक्सीमीटर, अगर गंभीर हैं तो सिलेंडर, अधिक मात्रा में द्रव पदार्थ ले, स्वसन अभ्यास.

वह चरण जिसमे अस्पताल जाना है- ऑक्सीजन का स्तर मॉनिटर करते रहे. अगर यह 43 (सामान्य 98-100) के आसपास जाता है तो आपको ऑक्सीजन सिलेंडर की जरुरत है. अगर यह घर पर उपलब्ध है तो अस्पताल जाने की कोई जरुरत नहीं है अन्यथा अस्पताल का रूख करें.

स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें.

कृपया भारत में अपने कॉन्टैक्ट्स को भेजें. क्या पता इससे किसी की सहायता हो जाये. टाटा ग्रुप ने यह सराहनीय कदम उठाया है, वे मुफ्त में ऑनलाइन डॉक्टर्स की सलाह दे रहें हैं. यह एक प्रयास है ताकि आप घर बैठे कोरोना से लड़ सकें.

निचे इस सुविधा का लाभ उठाने का लिंक है, मैं आप सभी से निवेदन करता हूं कि इस सुविधा का लाभ उठाये.

Verification: कोरोना वायरस को लेकर फैली गलत और भ्रामक जानकारी तथा अफवाहों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. भारत में कोरोना के केसों में वृद्धि के साथ वायरस से जुड़ी गलत जानकारी भी उत्तरोत्तर वृद्धि कर रही है. इसी क्रम में टाटा ग्रुप द्वारा संचालित टाटा हेल्थ से जुड़ा एक दावा वायरल हो रहा है. हमारे व्हाट्सऐप हेल्पलाइन नंबर पर कई यूजर्स द्वारा यही दावा फॉरवर्ड किया गया.

अपनी पड़ताल के पहले चरण में जब हमने वायरल मेसेज के साथ फॉरवर्ड की जा रही लिंक की पड़ताल की तो हमें पता चला कि यह लिंक सच में टाटा हेल्थ की आधिकारिक वेबसाइट पर ले जाता है.

अगर वायरल मैसेज को गौर से देखा जाये तो यह पता चलता है कि यह मैसेज टाटा जैसे किसी प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा लिखा हुआ नहीं हो सकता क्योंकि वायरल मैसेज में कई ऐसी व्याकरणीय गलतियां हैं जो कि आम तौर पर टाटा जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा नहीं की जाती है। वायरल मैसेज के पहले भाग में जहाँ घर पर रखे जाने वाले किट का विवरण दिया गया है उसकी नम्बरिंग में 3 के बाद सीधा 5 आता है यानि पॉइंट नंबर 4 है ही नही। अब अगर इस मैसेज को गौर से देखा जाये तो इसमें कई वर्तनी संबंधी गलतियां हैं जैसे कि Aarogya Setu कि वर्तनी को Arogya Setu लिखा गया है, Request को Reqest लिखा गया है। इतना ही नहीं पूरे सन्देश में कई जगहों पर अंग्रेजी व्याकरण के नियमों का पालन नहीं किया गया है जैसे कि कैपिटल लेटर कि जगह स्माल लेटर लिखना, अनावश्यक स्पेस छोड़ना या फिर आवश्यक स्पेस भी ना छोड़ना इत्यादि.

अब अगर वायरल मैसेज में बताये गए बिंदुओं पर ध्यान दें तो पता चलता है कि कोरोना वायरस के जिन तीन चरणों का वायरल मैसेज में जिक्र है वह विश्व स्वास्थ्य संगठन या भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों से मेल नहीं खाते।  इतना ही नहीं वायरल मैसेज में घर बैठे कोरोना वायरस के इलाज की बात की गई है जो कि ना सिर्फ भ्रामक है बल्कि जानलेवा भी है। भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय तथा अनेकों विश्वस्तरीय स्वास्थ्य संगठनों ने इस बात कि सलाह दी है कि अगर किसी व्यक्ति में कोरोना वायरस के लक्षण प्रतीत हो तो उसे तुरंत डॉक्टर कि सलाह लेनी चाहिए या फिर अपने देश या राज्य कि सरकारों द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर लक्षणों की सूचना देनी चाहिए।

वायरल मैसेज की विश्वनीयता जानने के लिए जब हमने टाटा हेल्थ के ट्विटर हैंडल को खंगाला तो हमें पता चला कि टाटा हेल्थ ने इस दावे को फर्जी करार दिया है। एक ट्विटर यूजर द्वारा यही दावा शेयर कर जब टाटा हेल्थ से इसकी विश्वनीयता के बारे में पूछा तब टाटा हेल्थ ने यूजर को जवाब देते हुए यह जानकरी दी कि वायरल मैसेज उनके द्वारा जारी नहीं किया गया है तथा यह मैसेज फर्जी है।

No Title

No Description

टाटा हेल्थ ने ट्विटर पर पिन किये हुए अपने ट्वीट में लोगों से अपील की है कि वे किसी भ्रामक संदेश पर भरोसा ना करें तथा स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए चिकित्सक का परामर्श लें.

No Title

No Description

हमारी पड़ताल में यह साबित होता है कि वायरल मैसेज टाटा हेल्थ द्वारा जारी नहीं किया गया है।

Sources

Google Search

Twitter Advanced Search

Result: False

(किसी संदिग्ध ख़बर की पड़ताल, संशोधन या अन्य सुझावों के लिए हमें WhatsApp करें: 9999499044  या ई-मेल करें: checkthis@newschecker.in)

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क्या कोरोना से होने वाली मौत पर आश्रितों को पीएम सुरक्षा बीमा योजना के तहत मिलेंगे 2 लाख रुपये?

दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों की कोरोना वायरस से मौत हुई है उनके परिवार को मोदी सरकार की दो योजनाओं से 2 लाख रूपए मिल सकते हैं।

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दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों की कोरोना वायरस से मौत हुई है उनके परिवार को मोदी सरकार की दो योजनाओं से 2 लाख रूपए मिल सकते हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक मैसेज बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों की कोरोना वायरस से मौत हुई है उनके परिवार को मोदी सरकार की दो योजनाओं से 2 लाख रूपए मिल सकते हैं।

वायरल मैसेज का हिंदी अनुवाद-

यदि आपके किसी रिश्तेदार या दोस्त की कोविड-19 के कारण मौत हो जाती है तो बैंक से उनकी बैंक स्टेटमेंट चेक करें या फिर 01-04 से लेकर 31-03 की तारीख तक पासबुक में एंट्री चेक करें। अगर बैंक स्टेटमेंट में अप्रैल 2019 से मार्च 2020 के बीच 12 रूपए प्रति माह या 330 रूपए प्रति माह की किश्त कटी है तो परिवार को सरकारी बीमा योजना के जरिए 2 लाख रूपए मिलेंगे। यह राशि ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’ (PMJJBY) या फिर प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) के तहत मिलेगी।

Please Note Very Important Notice : If someone in a close relative / friends circle has *died* due to Covid-19 or…

Posted by Tgv bharath on Wednesday, September 23, 2020

वायरल पोस्ट के आर्काइव वर्ज़न को यहां देखा जा सकता है।

फेसबुक पर इस पोस्ट को अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

Fact Check/Verification

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किए जा रहे दावे की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल शुरू किया। सबसे पहले हमने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) की आधिकारिक वेबसाइट को खंगाला।

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर हमने पाया कि इस योजना के तहत हर मरीने 330 रूपए की किश्त जमा करनी होती है। यह बीमा एक साल का होता है। इस बीमा योजना के तहत अगर किसी भी बीमा धारक की मौत हो जाती है तो उसके उत्तराधिकारी को 2 लाख रूपए मिलेंगे।

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के नियम और शर्तों में कहा गया है कि किसी भी कारण से मौत होने पर राशि का प्रावधान है। इससे यह साफ होता है कि अगर किसी भी बीमा वाले व्यक्ति की कोरोना के कारण मौत होती है तो उसे भी प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत दो लाख रूपए मिलेंगे।  

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) में एक्सीडेंट से मौत होना या फिर एक्सीडेंट से विकलांग होने पर क्लेम की राशि मिलती है। इस बीमा में सिर्फ 12 रूपए साल कि किश्त देनी होती है। केवल 18 से 70 वर्ष के लोग ही यह बीमा करा सकते हैं।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में कहीं भी ऐसा नहीं लिखा है कि कोरोना वायरस के कारण होने वाली मौत पर क्लेम मिलने का कोई प्रावधान है। इस बीमा के अंदर केवल एक्सीडेंटल डेथ वाले लागों को ही क्लेम मिलता है।

पड़ताल को जारी रखते हुए अब हमने यह जानने की कोशिश शुरू किया कि क्या कोविड-19 एक्सीडेंटल डेथ माना जाएगा? वायरल दावे की तह तक जाने के लिए हमने Insurance Regulatory and Development Authority of India की आधिकारिक वेबसाइट को खंगाला। खोज के दौरान हमने पाया कि केवल चोट लगने वाली मौत को एक्सीडेंटल डेथ माना जाता था। एक्सीडेंटल डेथ में सभी चोटें नहीं आती है केवल वो चोट आती हैं जिसमें सर्जरी की जरूरत पड़ती है। इससे यह साफ होता है कि कोरोना वायरस से होने वाली मौत को एक्सीडेंटल डेथ नहीं माना जाएगा।

Conclusion

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में कोरोना वायरस से होने वाली मौत को एक्सीडेंटल डेथ नहीं माना जाएगा। पड़ताल में हमने यह पाया कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में कोरोना वायरस से होने वाली मौत पर परिवार को बीमा राशि मिल सकती है। लोगों को भ्रमित करने के लिए सोशल मीडिया पर भ्रामक दावा किया जा रहा है।


Result: Misleading  


Our Sources

Pradhan Mantri Jeevan Jyoti Yojana https://jansuraksha.gov.in/Files/PMJJBY/English/About-PMJJBY.pdf?ref=inbound_article

Pradhan Mantri Suraksha Bima Yojana https://jansuraksha.gov.in/Files/PMSBY/English/About-PMSBY.pdf?ref=inbound_article


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चीन में नए वायरस से नहीं बल्कि बैक्टीरिया से हो रही है Brucellosis नाम की बीमारी

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि चीन की लैब से एक नया वायरस लीक हुआ है, जिससे लोगों में ब्रूसीलोसिस नाम की बीमारी फ़ैल रही है। दावा है कि इस वायरस से चीन में अब तक 3200 से ज्यादा लोग संक्रमित हैं।

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सोशल मीडिया पर एक खबर खूब वायरल हो रही है। खबर में दावा किया जा रहा है कि चीन की लैब से कोरोनावायरस के बाद अब एक और नया वायरस लीक हुआ है, जिसका नाम ब्रूसीलोसिस है, बताया जा रहा है कि इस वायरस से अब तक सैकड़ों लोग संक्रमित हो चुके हैं।

सोशल मीडिया के अन्य यूज़र्स ने भी चीन की लैब से एक नए वायरस के लीक होने की जानकारी दी है।

ब्रूसीलोसिस चीन वायरस बीमारी

इसी क्रम में भाजपा पार्टी के प्रवक्ता व विधायक प्रत्याशी तिजेन्दर पाल सिंह बग्गा ने भी एक नए वायरस की जानकारी देते हुए एक खबर का लिंक शेयर किया है।

खबर का आर्काइव लिंक यहाँ देखें।

Fact Check / Verification

चीन के वुहान शहर से फैले कोरोनावायरस ने अपने प्रकोप से पूरी दुनिया में भारी तबाही मचाई है, इस वायरस के सामने भारत जैसे तमाम विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था चित हो गयी है तो अमेरिका, रूस तथा कई विकसित देशों का भी बुरा हाल है।

अब तक पूरी दुनिया में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या तीन करोड़ के पार हैं वहीं इसके संक्रमण से मरने वालो की संख्या करीब नौ लाख के पार हो चुकी है।

इसी बीच सोशल मीडिया पर चीन की लैब से एक नए वायरस के लीक होने की खबर वायरल हो रही है। इस खबर में नए वायरस को ब्रूसीलोसिस बताया जा रहा है। ख़बर के मुताबिक इस वायरस से अब तक चीन में 3200 से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। इस दावे का सच जानने के लिए हमने अपनी पड़ताल आरम्भ की।

पड़ताल के दौरान हमने सबसे पहले गूगल पर चीन में किसी नए वायरस के लीक होने की खबर को खंगालना शुरू किया। जहां हमें Zee News की वेबसाइट पर 18 सितंबर को प्रकाशित एक लेख मिला। इस लेख में एक नई बीमारी का जिक्र किया गया है।

ब्रूसीलोसिस चीन वायरस बीमारी

लेख के मुताबिक चीन में एक नई बीमारी आयी है, जिससे अब तक 3200 से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। चीन के लोगों ने इस बीमारी को ब्रूसीलोसिस नाम दिया है।

प्राप्त लेख में इस बीमारी को बैक्टीरियल बीमारी बताया जा रहा है, यानि यह बीमारी वायरस से नहीं बल्कि बैक्टीरिया से हुई है।

इस बीमारी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने गूगल पर रिसर्च किया। इस दौरान हमें अमर उजाला की वेबसाइट पर इस नई बीमारी पर छपा एक लेख मिला।

उक्त लेख में मुताबिक ब्रूसीलोसिस एक बैक्टीरिया जनित बीमारी है जो आम तौर पर भेड़-बकरी,गाय, कुत्तों और सुअर को संक्रमित करती है। हालांकि इंसानों में भी इसका संक्रमण हो सकता है यदि इंसान संक्रमित जानवर के संपर्क में आएं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, ये बीमारी दुनिया के कई देशों में रिपोर्ट होती रही है। इसका इलाज भी संभव है।

ब्रूसीलोसिस नामक बीमारी चीन में फैली कैसे?

यह बीमारी लोगों में फैली कैसे इसकी जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने गूगल पर कुछ संबंधित कीवर्ड्स की सहायता ली। जिसे बाद हमें CNN की वेबसाइट पर हाल ही में छपा एक लेख मिला।

ब्रूसीलोसिस चीन वायरस बीमारी

लेख में बताया गया है कि यह बैक्टीरिया एक इंसान से दूसरे इंसान में बहुत कम फैलता है, आमतौर पर यह बैक्टीरिया संक्रमित जानवर के संपर्क में आने पर ही फैलता है।

लेख में जानकारी दी गयी है कि लानझोऊ बायोलॉजिकल फैक्ट्री में ‘ब्रूसेला वैक्सीन’ को बनाने के लिए एक्सपायर्ड सैनिटाइज़र और डिसइंफेक्टेंट्स का इस्तेमाल किया गया था। इससे दूषित बेकार गैस में एरोसोल निर्मित हो गया जिसमें बैक्टीरिया थे। जिसके बाद हवा से यह बैक्टीरिया इंसानों में फ़ैल गया।

पड़ताल के दौरान हमें NCBI की सरकारी वेबसाइट पर जून साल 2005 को छपा एक लेख मिला। जहां ब्रूसीलोसिस नाम की बीमारी का जिक्र किया गया है। प्राप्त इस लेख से जानकारी मिली कि यह बीमारी विश्व में नयी नहीं है।

इसके अलावा हमें भारत सरकार की वेबसाइट पर भी इस बीमारी की जानकारी मिली। भारत सरकार की वेबसाइट पर 26 अप्रैल साल 2018 को छपे एक लेख में ब्रूसीलोसिस नाम की बीमारी के बारे में जानकारी दी गयी है।

ब्रूसीलोसिस चीन वायरस बीमारी


Conclusion

वायरल दावे की पड़ताल में पता चला कि ब्रूसीलोसिस नाम की बीमारी न तो वायरस से फैलती है और न ही यह कोई नयी बीमारी है। असल में यह एक बैक्टीरियल बीमारी है जो बैक्टीरिया के जरिये लोगों में फैलती है। यह बीमारी एक इंसान से दूसरे इंसान में कम फैलती है। आमतौर पर इस बैक्टीरिया का संचार संक्रमित जानवर से होता है। इसके अलावा यह बीमारी कई वर्षों पहले से ही इंसानों के बीच मौजूद है।


Result: Misleading

Our Sources

https://edition.cnn.com/2020/09/17/asia/china-brucellosis-outbreak-intl-hnk/index.html

https://zeenews.india.com/hindi/world/new-disease-brucellosis-from-china-among-corona-so-many-people-infected-know-symptoms/750082

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/15845228/


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क्या इटली के डॉक्टरों ने कोरोना वायरस को बताया बैक्टीरिया? सोशल मीडिया पर फेक दावा वायरल है।

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर ऑटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि यह एक ग्लोबल घोटाला है।

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इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर अटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है।

व्हाट्सएप पर एक मैसेज बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर ऑटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि एक ग्लोबल घोटाला है। लोग असल में “ऐमप्लीफाईड ग्लोबल 5G इलैक्ट्रोमैगनेटिक रेडिएशन (ज़हर)” के कारण मर रहे हैं।

दावा किया गया है कि इटली ने इस वायरस को हराया है और कहा है कि “फैलीआ-इंट्रावासकूलर कोगूलेशन (थ्रोम्बोसिस) के अलावा और कुछ नहीं है। इसका मुकाबला करने का तरीका आर्थात इलाज कुछ इस तरह बताया गया है।

ऐंटीबायोटिकस (Antibiotics tablets}

ऐंटी-इंनफ्लेमटरी (Anti-inflammatory) और

ऐंटीकोआगूलैटस (Aspirin) को लेने से यह ठीक हो जाता है।

इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करने की अपील की गई है।

नीचे देखा जा सकता है कि हमारे आधिकारिक नंबर पर यूज़र द्वारा वायरल दावे की सत्यता जानने की अपील की गई थी।”

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर अटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि यह एक ग्लोबल घोटाला है।

ट्विटर पर भी वायरल दावे को अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

Fact Check/Verification

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल शुरू किया। हमने हर दावे को क्रमशः खोजना शुरू किया।

पहला दावा

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर ऑटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि बैक्टीरिया है। जिसकी वजह से खून के थक्के जम जाते हैं और मरीज की मौत हो जाती है।

पड़ताल के दौरान हमें The Lancet की एक रिपोर्ट मिली। इसके मुताबिक कोरोना वायरस में रेस्पिरेटरी फेल्योर को मौत का मुख्य कारण माना गया है। इसकी कारण से नसों में खून के थक्के जम जाते हैं और मरीज की मौत हो जाती है। हमें इस तरह की भी कोई जानकारी नहीं मिली कि कोविड-19 वायरस नहीं, बैक्टीरिया है।

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर अटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि यह एक ग्लोबल घोटाला है।

दूसरा दावा

WHO का कानून कोविड-19 से मरने वाले लोगों के शरीर का पोस्टमॉर्टम करने की अनुमति नहीं देता है। लेकिन इटली में कोविड मृत शरीर का पोस्टमॉर्टम किया और पाया कि यह वायरस नहीं बल्कि बैक्टीरिया है।

इस दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने World Health Organization की आधिकारिक वेबसाइट को खंगाला। पड़ताल के दौरान हमने पाया कि डब्लूएचओ ने ऐसा कोई कानून नहीं बनाया है जो कोरोना वायरस से मरने वाले के शरीर का पोस्टमॉर्टम या रिसर्च करने से रोकता हो।

पड़ताल के दौरान हमें डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस मिली। जिसमें बताया गया है कि कोरोना वायरस से मरने वालों को इस तरह से उपचार करना चाहिए जिससे बाकी लोगों को सुरक्षित किया जा सके और आगे किसी में संक्रमण फैलने से रोका जा सके।

अधिक खोजने पर हमें WHO द्वारा Myth Buster का सेक्शन मिला जिसमें बताया गया है कि कोरोना वायरस एक वायरस है, कोई बैक्टीरिया नहीं।

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर अटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि यह एक ग्लोबल घोटाला है।

तीसरा दावा

इटली के वैज्ञानिकों ने पाया कि इसका इलाज एंटीबायोटिक्स, एंटी इन्फ्लेमेटरी या एस्प्रिन से किया जा सकता है।

WHO की आधिकारिक वेबसाइट खंगालने पर हमने पाया कि वह पहले ही साफ कर चुका है कि कोरोना वायरस एक वायरस है और इसका इलाज किसी भी तरह की एंटीबायोटिक्स से नहीं किया जा सकता है।

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर अटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि यह एक ग्लोबल घोटाला है।

अधिक खोजने पर हमें 24 अगस्त, 2020 को Reuters द्वारा प्रकाशित की गई मीडिया रिपोर्ट मिली। इसके मुताबिक इटली ने कोरोना वायरस वैक्सीन पर ह्यूमन ट्रायल शुरू कर दिया है। अब सोचने वाली बात यह है कि अगर वहां कोरोना वायरस का इलाज एंटीबायोटिक्स से हो रहा होता तो वो वैक्सीन का परीक्षण क्यों करता।

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर अटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि यह एक ग्लोबल घोटाला है।

चौथा दावा

लोग कोरोना वायरस से नहीं बल्कि 5G इलेक्ट्रोमैगनेटिक रेडिएशन ज़हर के कारण मर रहे हैं।

पड़ताल के दौरान हमें अप्रैल, 2020 में ET Telecom द्वारा प्रकाशित की गई एक रिपोर्ट मिली। इसके मुताबिक कोरोना वायरस के लिए हाई स्पीड ब्राडबैंड 5G जिम्मेदार नहीं है। इन दोनों का आपस में कोई तकनीकी आधार नहीं है।

इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसने एक कोविड-19 से मृत शरीर पर अटोप्सी (Postmortem) का आयोजन किया है। जांच में पता लगा है कि यह एक वायरस नहीं बल्कि यह एक ग्लोबल घोटाला है।

कुछ अलग-अलग कीवर्ड्स की मदद से गूगल खंगालने पर हमें वायरल दावे से संबंधित कोई मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली।  

Conclusion

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि इटली के डॉक्टरों के नाम से वायरल हो रहा दावा फर्ज़ी है। पड़ताल में हमने पाया कि इटली ने कोविड-19 से मृत शरीर पर ऑटोप्सी (Postmortem) नहीं किया है।


Result: False


Our Sources

World Health Organization https://www.who.int/emergencies/diseases/novel-coronavirus-2019/advice-for-public/myth-busters#virus

Reuters https://www.reuters.com/article/us-health-coronavirus-italy/italy-begins-testing-potential-covid-19-vaccine-on-volunteers-idUSKBN25K17F?ref=inbound_article

ET Telecom https://telecom.economictimes.indiatimes.com/news/theory-of-5g-spreading-covid-19-a-hoax-that-has-no-technical-basis-un-ict-agency/75318703


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