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Fact Check

भूटान ने नहीं रोका असम के किसानों के लिए दिया जाने वाला पानी, सोशल मीडिया में वायरल हुआ भ्रामक दावा

ट्विटर पर बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने South-Asian Monitor द्वारा प्रकाशित किया गया एक लेख ट्वीट किया है। इसके मुताबिक भूटान ने इस साल असम के किसानों को दिया जाने वाला पानी रोक दिया है। जिस वजह से किसान बहुत परेशान हो रहे हैं।

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Claim: भूटान ने इस साल असम के किसानों को दिया जाने वाला पानी रोक दिया है। 

जानिए क्या है वायरल दावा:

ट्विटर पर बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने South-Asian Monitor द्वारा प्रकाशित किया गया एक लेख ट्वीट किया है। इसके मुताबिक भूटान ने इस साल असम के किसानों को दिया जाने वाला पानी रोक दिया है। जिस वजह से किसान बहुत परेशान हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस घटना को नेपाल और चीन के साथ पहले से चल रहे विवाद से जोड़ा जा रहा है। बीजेपी सांसद द्वारा दावा किया गया है कि भूटान ने इस साल असम के किसानों को दिया जाने वाला पानी रोक दिया है। 

ट्वीट के आर्काइव वर्ज़न को यहां देखा जा सकता है।

Verification:

कुछ कीवर्ड्स की मदद से खंगालने पर हमने पाया कि वायरल दावे को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

भूटान ने बढ़ाई भारत की टेंशन, असम के 6000 किसानों का रोका पानी #BreakingNews #Bhutan #LatestNews https://www.prabhasakshi.com/international/bhutan-stops-flow-of-irrigation-water

Người đăng: Prabhasakshi vào Thứ Năm, 25 tháng 6, 2020

लो,,,अब भूटान ने भारत का पानी रोका,,असम के किसानों की फसलें खराब ,,ये हो क्या रहा है देश एक घंटा बन गया है जो आ रहा है बजा दे रहा,

Người đăng: A.K. Siddiqui vào Thứ Tư, 24 tháng 6, 2020

वायरल दावे की सत्यता जानने के लिए सबसे पहले हमने भूटान सरकार की तरफ से जारी किए गए हालिया बयानों को खोजना शुरू किया। पड़ताल के दौरान हमें Ministry of Foreign Affairs, Royal Government of Bhutan ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर पूरी घटना का एक स्पष्टीकरण दिया है। 

भूटान विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण में बताया कि सामान्य परिस्थितियों में असम के किसान भूटान जाकर पानी डायवर्ट करते थे। महामारी के समय ऐसा करना संभव नहीं है क्योंकि सीमा पार आने वाले किसी भी व्यक्ति को 21 दिन क्वारेंटाइन में रहना होता है। इसके बाद भी पानी की सप्लाई जारी रखी गई थी। लेकिन भारी बारिश के कारण नहरों में पानी ठहर गया जिसकी वजह से सप्लाई रूक गई। भूटान और असम के लोगों के बीच अच्छे संबंध हैं। लोगों को भ्रमित करने के लिए इस तरह की खबरें फैलाई जा रही है। 

https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2020/06/26/fact1_1593182925.png

अधिक खोजने पर हमें Ministry of Foreign Affairs द्वारा जारी की गई प्रेस रिलीज मिली। जिसमें बताया गया है कि हाल ही में भारत में प्रकाशित की गई मीडिया रिपोर्ट पर मिनिस्ट्री द्वारा स्पष्टीकरण दिया गया है। यहां तक कि मंत्रालय ने तस्वीरें जारी की हैं कि स्थानीय प्रशासन किस तरह से सिंचाई चैनलों को साफ करने के लिए काम कर रहा है।

The Bhutanese ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भी कुछ तस्वीरों को ट्वीट कर बताया कि कैसे स्थानीय प्रशासन सिंचाई चैनलों को साफ करने के लिए काम कर रहे हैं। 

अधिक खोजने पर हमने जाना कि वायरल हो रही तस्वीर अभी की नहीं बल्कि 5 साल पुरानी है। इस तस्वीर को Ministry of Agriculture and Forests की आधिकारिक वेबसाइट से उठाया गया है। 

ट्विटर खंगालने पर हमें न्यूज़ एजेंसी ANI द्वारा किया गया एक ट्वीट मिला। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्णा ने कहा कि असम में सिंचाई का पानी भूटान की पहाड़ियों से आता है। कई बार बड़े पत्थरों की वजह से पानी का बहाव रूक जाता है। हमने भूटान से बात की और उसने तुरंत इसे ठीक कर दिया है। कोई विवाद भी नहीं है। 

कुछ कीवर्ड्स की मदद से गूगल खंगालने पर हमें दैनिक भास्कर द्वारा प्रकाशित की गई मीडिया रिपोर्ट मिली। इसके मुताबिक बारिश के कारण भूटान की कई नदियों में पानी का स्तर बढ़ गया है। इस वजह से बांधों की देखरेख सही ढंग से नहीं हो पा रही है। इस वजह से असम की ओर जाने वाली नहरों में कई जगह पानी ठहर गया है। 

कुछ मीडिया आउटलेट्स जैसे Times of India, News18 और South Asian Monitor ने भी लोगों को भ्रमित करने के लिए गलत खबर प्रकाशित की थी। 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा किया गया दावा पूरी तरह से गलत है। पड़ताल में हमने पाया कि भूटान से असम में सप्लाई होने वाला पानी बारिश की वजह से हुई तकनीकी खराबी की वजह से रुका है। लोगों को भ्रमित करने के लिए भ्रामक दावा शेयर किया जा रहा है। भूटान की तरफ से इस बात का खंडन किया गया है।  

Result: Misleading

Tools Used:

Google Keywords Search 

Facebook Search 

Twitter Search 

(किसी संदिग्ध ख़बर की पड़ताल, संशोधन या अन्य सुझावों के लिए हमें WhatsApp करें: 9999499044  या ई-मेल करें: checkthis@newschecker.in)

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क्या चीन सीमा पर भारत ने ट्रेन से भेजे युद्धक टैंक?

लद्दाख में LAC पर भारत और चीन के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में फेसबुक पर 30 सेकेंड की एक वीडियो बहुत वायरल हो रही है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे मालगाड़ी में बहुत सारे टैंक कहीं जा रहे हैं।

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अमेरिका की वीडियो को भारत-चीन सीमा विवाद से जोड़कर किया वायरल
भारतीय सेना ने चीन का दिमाग ठीक करने का काम चालू कर दिया है। “हिंदुस्तान जिंदाबाद”

ये चीन का दिमाग ठीक करने का काम चालू हो गया है "हिंदुस्तान जिन्दाबाद "🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

Người đăng: Shweta Hulle vào Thứ Sáu, 26 tháng 6, 2020
जानिए क्या है वायरल दावा:

लद्दाख में LAC पर भारत और चीन के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में फेसबुक पर 30 सेकेंड की एक वीडियो बहुत वायरल हो रही है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे मालगाड़ी में बहुत सारे टैंक कहीं जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि भारतीय सेना ने चीन का दिमाग ठीक करने के लिए यह काम चालू कर दिया है। 

वायरल वीडियो के आर्काइव वर्जन को यहां देखा जा सकता है। 

Verification:

भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी विवाद को कम करने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। वहीं भारत ने चीन की चाल को नाकाम करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। भारतीय सेना ने टी-90 भीष्म मिसाइल फायरिंग 6 टैंक सीमा पर तैनात किए हैं। इसके साथ ही ऐंटी टैंक विरोधी मिसाइल सिस्टम भी गलवान घाटी में तैनात किए गए हैं। कुछ टूल्स और कीवर्ड्स की मदद से हमने वायरल वीडियो को खंगालना शुरू किया। 

देखा जा सकता है कि वायरल वीडियो को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है। 

ये चीन का दिमाग ठीक करने का काम चालू हो गया है "हिंदुस्तान जिन्दाबाद "

ये चीन का दिमाग ठीक करने का काम चालू हो गया है "हिंदुस्तान जिन्दाबाद "

Người đăng: Bishnoi vào Chủ nhật, 21 tháng 6, 2020

InVID की मदद से मिले कीफ्रेम्स को Yandex Search करने पर हमें इससे संबंधित कई परिणाम मिले।

पड़ताल के दौरान मिले परिणामों की मदद से हमें Trains 232 नामक चैनल पर अपलोड की गई एक वीडियो मिली। यह वीडियो 16 जुलाई, 2017 को अपलोड की गई थी और वीडियो के डिस्क्रिप्शन में लिखा गया है कि BNSF Military (Abrams Tanks) Train Over Tehachapi (तहचापी के ऊपर BNSF मिलिट्री ट्रेन)।   

BNSF Military (Abrams Tanks) Train over Tehachapi

अधिक खोजने पर हमें Boxing Highlights 2019 और Fakty Mity Sensacje Eksploracje नामक पर अपलोड की गई वीडियो मिली। यह वीडियो 28 फरवरी, 2019 और 21 नवंबर, 2019 को अपलोड की गई थी। इस वीडियो के डिस्क्रिप्शन में भी लिखा गया है कि BNSF Military (Abrams Tanks) Train Over Tehachapi 1.

गूगल पर हमने Tehachapi को खोजा। पड़ताल में हमने पाया कि Tehachapi दक्षिणी कैलिफोर्निया (Southern California) के Tehachapi पहाड़ों में स्थित एक शहर है।

वीडियो को ध्यान से देखने पर हमने पाया कि ट्रेन के इंजन पर बड़ा-बड़ा BNSF लिखा हुआ है।

गूगल करने पर हमने पाया कि BNSF रेलवे कंपनी है जो कि उत्तरी अमेरिका (North America) में सबसे बड़ा माल वाहक रेल (Railroad) नेटवर्क है।

ट्विटर खंगालने पर हमें BNSF Railways का आधिकारिक हैंडल भी मिला। ट्विटर बायो में भी लिखा हुआ है कि BNSF उत्तरी अमेरिका (North America) में सबसे बड़ा माल वाहक रेल (Railroad) नेटवर्क है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही वीडियो का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि 16 जुलाई, 2017 को इंटरनेट पर अपलोड की गई वीडियो को भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। पड़ताल में हमने पाया कि इस वीडियो का भारत से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं वायरल वीडियो का भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद से कोई संबंध नहीं है। 

Tools Used

  • InVID
  • Yandex Search 
  • Twitter Search 
  • Google Keywords Search 

Result: False

(किसी संदिग्ध ख़बर की पड़ताल, संशोधन या अन्य सुझावों के लिए हमें WhatsApp करें: 9999499044  या ई-मेल करें: checkthis@newschecker.in)

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क्या TikTok के साथ इंडिया में बैन हुआ PUBG गेम?

सोशल मीडिया के कई माध्यमों पर इन दिनों चाइनीज़ एप्स को बैन किये जाने की ख़बरें सुर्ख़ियों में हैं। इसी बीच यह भी दावा किया जा रहा है कि 59 चीनी एप्स के साथ ही पबजी गेम पर बैन लगा दिया गया है।

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सोशल मीडिया में दावा किया जा रहा है कि 59 चीनी एप्स के साथ ही PUBG गेम पर बैन लगा दिया गया है। सोशल मीडिया यूजर्स तो यहाँ तक दावा कर रहे हैं कि PUBG एक चीनी एप्प है इसीलिए इस पर भी भारत सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है।

Facebook PUBG Game, PUBG गेम पर बैन नहीं लगाया गया है
PUBG game Facebook Newschecker. PUBG गेम पर बैन नहीं लगाया गया है

फैक्ट चेक

गलवान घाटी में उपजे सीमा विवाद के बाद भारत सरकार ने 59 चीनी एप्स पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। इसी बीच सोशल मीडिया में दावा किया जा रहा है कि प्रतिबंधित एप्स में PUBG गेम भी शामिल है। दावे की पड़ताल के लिए सबसे पहले यह जानने का प्रयास किया कि किन चीनी एप्स पर सरकार ने प्रतिबन्ध लगाया है। कुछ कीवर्ड्स के माध्यम से की गई पड़ताल में कई मीडिया रिपोर्ट्स खुलकर सामने आई।

Media reports on Google. PUBG गेम पर बैन नहीं लगाया गया है
Banned Chines Apps list. PUBG गेम पर बैन नहीं लगाया गया है


खोज के दौरान PIB की वेबसाइट पर प्रेस रिलीज के माध्यम से यह साफ किया गया है कि 59 चीनी एप्स पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। हालाँकि इस लिस्ट में कहीं भी पबजी गेम का नाम शामिल नहीं किया गया है।

कुछ कीवर्ड्स के माध्यम से इस बात का पता लगाना शुरू किया कि आखिर पबजी गेम है क्या? साथ ही इस बात का पता लगाना भी आवश्यक था कि क्या यह एप्प चीन का है। खोजने पर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स सामने आयी। मीडिया रिपोर्ट्स पढ़ने के बाद पता चला कि लॉकडाउन के दौरान यह गेम सबसे ज्यादा खेला गया।

PubG Media reports. PUBG गेम पर बैन नहीं लगाया गया है

चीन नहीं दक्षिण कोरिया की है PUBG गेम

PUBG गेम की आधिकारिक वेबसाइट खंगालने पर पता चला कि इसका मालिकाना हक़ Krafton game union के पास है जो दक्षिण कोरिया की कम्पनी है।

KRAFTON Game Union.
Krafton game union is a south korean game holding company.

इसके अलावा हमने अपने सेल फोन के गूगल प्ले स्टोर पर जाकर चेक किया तो पता चला कि इस गेम को इंस्टाल किया जा सकता है।

PUBG गेम पर बैन नहीं लगाया गया है

हमारी पड़ताल में यह साफ़ हो गया कि भारत सरकार ने पबजी गेम पर बैन नहीं लगाया है। सोशल मीडिया में भ्रामक दावा किया जा रहा है।


Tools Used

  • Google Search
  • Twitter Advanced Search
  • Snipping
  • Facebook

Result- Misleading

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क्या फसल काटने से मना करने पर लोगों ने कर दी युवक-युवती की पिटाई? जानिए क्या है वायरल दावे का सच

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। जहां कुछ लोगों की भीड़ द्वारा एक युवक-युवती को प्रताड़ित करते हुए देखा जा सकता है।

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Claim

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। जहां कुछ लोगों की भीड़ द्वारा एक निर्वस्त्र जोड़े को प्रताड़ित करते हुए देखा जा सकता है। पोस्ट शेयर करने वाले यूज़र का दावा है कि यह वीडियो उत्तर प्रदेश के जनपद देवरिया से है। जहां एक दलित लड़के-लड़की को खेत में फसल काटने से मना करने पर निर्वस्त्र करके पीटा जा रहा है।

फैक्ट चेक

ट्विटर पर वायरल हो रहे निर्वस्त्र लड़के-लड़की के वीडियो को दलित समुदाय के साथ हो रहे अन्याय का बता कर शेयर किया जा रहा है। वायरल वीडियो को ट्विटर पर कई अन्य यूज़र्स ने भी शेयर किया है।


वीडियो के साथ वायरल हो रहे दावे का सच जानने के लिए हमने वीडियो को कुछ कीफ्रेम्स में तोड़कर खोजने का प्रयास किया। लेकिन खोज में हमें वायरल वीडियो की कोई जानकारी नहीं मिली।

अब वायरल वीडियो की जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने वीडियो को कीफ्रेम्स और कुछ कीवर्ड्स की मदद से Google पर खोजा। इस दौरान हमें ट्विटर पर वायरल वीडियो के कुछ स्क्रीनशॉट्स प्राप्त हुए। जिन्हें किसी यूज़र द्वारा साल 2017 में अपलोड किया गया था।

प्राप्त ट्वीट से हमें पता चला कि वायरल वीडियो कई वर्ष पुराना है। ट्वीट में यह भी बताया गया है कि यह घटना एक प्रेमी जोड़े के साथ घटित हुई है। साथ ही यहाँ पर लड़का-लड़की को दलित बताने वाला दावा भी नहीं किया गया है।

पड़ताल के दौरान हमें उत्तर प्रदेश पुलिस का ट्वीट भी प्राप्त हुआ। यूपी पुलिस ने वायरल वीडियो पर रिप्लाई करते हुए यह बताया है कि वीडियो कई वर्ष पुराना है और इसका देवरिया से कोई संबंध नहीं है।

ट्वीट का आर्काइव लिंक यहाँ देखें।

उपरोक्त मिले साक्ष्यों के बाद हमने वायरल वीडियो की सटीक जानकारी प्राप्त करने लिए और बारीकी से Google पर खोजा। जहां हमें वायरल वीडियो से मेल खाता एक वीडियो आजतक के यूट्यूब चैनल पर मिला। प्राप्त वीडियो को चैनल पर साल 2017 में अपलोड किया गया था।

आजतक

यूट्यूब पर इस वीडियो की जानकारी देते हुए यह बताया गया है कि उक्त घटना साल 2017 में राजस्थान के बांसवाड़ा इलाके के शम्भूपुरा गांव की है। जहां गांव का एक प्रेमी जोड़ा गुजरात भाग गया था। लेकिन परिवारवालों ने ढूंढ लिया और उन्हें वापस गांव ले आए। इस मामले में खाप पंचायत के फैसले के बाद लड़के-लड़की को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाया जा रहा है।

वायरल वीडियो पर मिली जानकारी की पुष्टि के लिए हमने गूगल पर और बारीकी से खोजा। खोज के दौरान Rajasthan Post नाम की एक वेबसाइट पर साल 2017 में प्रकाशित एक लेख से पता चला कि वायरल वीडियो क्लिप राजस्थान की है।

इसके अलावा वायरल वीडियो हमें Mirror Now के यूट्यूब चैनल पर भी प्राप्त हुआ। जहां घटना की पूरी जानकारी दी गयी है।

पड़ताल के दौरान कई टूल्स और कीवर्ड्स की मदद से हमें पता चला कि वायरल वीडियो हाल का नहीं बल्कि साल 2017 का है। साथ ही वीडियो राजस्थान के शंभूपुरा गांव का है और इसका देवरिया से कोई संबंध नहीं है।

Tools Used 

  • InVid
  • Google Search
  • Twitter Advanced Search
  • Reverse Image Search

Result: Misleading


(किसी संदिग्ध ख़बर की पड़ताल, संशोधन या अन्य सुझावों के लिए हमें WhatsApp करें: 9999499044  या ई-मेल करें: checkthis@newschecker.in)


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