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आदित्य ठाकरे के साथ दिख रही युवती नहीं हैं रिया चक्रवर्ती, दिशा पटानी को रिया बताकर सोशल मीडिया पर शेयर की गई फेक न्यूज़

आदित्य ठाकरे के साथ कार में बैठी युवती को रिया चक्रवर्ती बताया गया है। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर तेजी से शेयर की जा रही है।

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रिया चक्रवर्ती के साथ उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे हैं।
क्या यही वजह है कि महाराष्ट्र सरकार सुशांत का केस सीबीआई को नहीं दे रही है। दाल में जरूर कुछ काला है।

https://www.facebook.com/groups/PMNarendraModiG/permalink/817152788847586/

Facebook Screenshot
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सोशल मीडिया के कई माध्यमों पर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे की एक तस्वीर वायरल हो रही है। कार में आदित्य ठाकरे के साथ वाली सीट पर एक युवती बैठी है। यूजर्स दावा कर रहे हैं कि आदित्य के साथ रिया चक्रवर्ती हैं । इसीलिए महाराष्ट्र सरकार सुशांत सिंह राजपूत के मामले को CBI को नहीं सौंप रही है। गौरतलब है कि रिया चक्रवर्ती के खिलाफ सुशांत सिंह राजपूत के पिता ने मामला दर्ज़ कराया है। यह दावा सोशल मीडिया के कई माध्यमों पर शेयर किया जा रहा है। ट्विटर और फेसबुक का आर्काइव यहाँ और यहाँ देखा जा सकता है।

Fact Check/Verification

सुशांत सिंह राजपूत (Sushant singh Rajput) द्वारा की गई आत्महत्या के बाद सोशल मीडिया (Social Media) पर एक बहस छिड़ी हुई है। कोई इसको हत्या बता रहा है तो कोई आत्महत्या। इसी कड़ी में सुशांत के पिता की तहरीर पर बिहार पुलिस ने सुशांत की गर्लफ्रैंड रिया चक्रवर्ती (riya chakravarthi) के खिलाफ मनी लांड्रिंग सहित कई धाराओं में मामला दर्ज़ किया है। एक तरफ जहां इस प्रकरण में बिहार पुलिस (Bihar Police) ने मामला दर्ज़ कर जांच शुरू कर दी है तो दूसरी तरफ आरोप लग रहे हैं कि महाराष्ट्र पुलिस इस मामले में बिहार पुलिस का सहयोग नहीं कर रही है। क्या रिया चक्रवर्ती और आदित्य ठाकरे के बीच दोस्ती की वजह से मुंबई पुलिस इस मामले में हीला हवाली कर रही है? इस बात की पड़ताल आरम्भ की। सबसे पहले गूगल रिवर्स इमेज की मदद से वायरल चित्र को खोजना शुरू किया। खोज के दौरान कई मीडिया रिपोर्ट्स सामने आईं जिनसे पता चला कि आदित्य ठाकरे के साथ कार में बैठी युवती रिया चक्रवर्ती नहीं हैं।

Google Reverse image SS
SS Reverse image

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वायरल तस्वीर एक साल पहले की है। यह तस्वीर मार्च 2019 की है जब आदित्य ठाकरे और अभिनेत्री दिशा पटानी लंच पर बांद्रा के एक रेस्टोरेंट में गए थे। गौरतलब है कि उस समय आदित्य सूबे के मंत्री नहीं थे। आदित्य दिसंबर साल 2019 में महाराष्ट्र के मंत्री बनाये गए थे। India TV सहित देश के कई प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों ने इस चित्र को अपने लेख में प्रकाशित किया था। वायरल तस्वीर पर प्रकाशित कई मीडिया रिपोर्ट्स को यहाँ देखा जा सकता है।

SS

Conclusion:

हमारी पड़ताल में यह साबित हो गया कि आदित्य ठाकरे के साथ कार में बैठी युवती रिया चक्रवर्ती नहीं बल्कि अभिनेत्री दिशा पटानी हैं। यह उस समय की तस्वीर है जब आदित्य ठाकरे सूबे के मंत्री नहीं थे।

Result- False

Sources:

India Tv- https://www.indiatvnews.com/photos/entertainment-disha-patani-looks-fresh-as-daisy-as-she-steps-out-with-aditya-thackeray-for-lunch-outing-pics-inside-508555

Other Media Reports- https://www.google.com/search?tbs=sbi:AMhZZiuV4qYIXK9-Oli2448pEOt2g1wgQK1TDrfRjf78fUiYJ42xmamtPQghCBFXwgZHvAu0ScOVSV5MhGOwukQ6unDImay4MJCXtotmTIzdFIf2oituQNnX–sAhWTBa7r14PKeLAWthcN0ldOLJZb42swX4flXWcrxPD852zn8PN22ND39TXJ_1iR1YpBI8OEOGHCFdzAaXdWISS8IIAIH9Q-L-YrIewWrS3giljGf2LFZShCCH1c5pMiGARiM1ilrRwcOZOsMdHGPzcgrOzvYlW_1JHT2PDE-cNtC_1co_1RRLYpmIrY7s4UZKzayF5LJYwSRqhwIlGSd&btnG=Search%20by%20image&hl=en-IN


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क्या लखनऊ में संविदा पुलिसकर्मियों की हुई जमकर पिटाई? रांची में हुए प्रदर्शन को गलत दावे के साथ किया गया शेयर।

उत्तर प्रदेश में संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि लखनऊ में स्थायी तौर पर नियुक्त पुलिस कर्मियों द्वारा संविदा पर नियुक्त पुलिस कर्मियों की पिटाई का मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया.

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शिवसेना नेता संजय राउत के नाम पर बने एक पैरोडी ट्विटर हैंडल तथा कई अन्य ने यह दावा किया कि लखनऊ में संविदा पर रखे गए पुलिस कर्मियों की स्थायी तौर पर नियुक्त पुलिस कर्मियों ने जमकर पिटाई कर दी.

ऐसे ही तमाम अन्य दावे यहां देखे जा सकते हैं.

फेसबुक पर भी इस दावे को कई लोगों ने शेयर किया है जिसे यहां देखा जा सकता है.

उत्तर प्रदेश में संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि लखनऊ में स्थायी तौर पर नियुक्त पुलिस कर्मियों द्वारा संविदा पर नियुक्त पुलिस कर्मियों की पिटाई का मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया. आमतौर पर पुलिस प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए बल प्रयोग करती है लेकिन प्रदर्शनरत अगर स्वयं पुलिसकर्मी हो तो ऐसे में मामला थोड़ा दिलचस्प हो जाता है और यही दिलचस्पी इस दावे को चर्चा का विषय बनाती है.

वीडियो का सच जानने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो को की- फ्रेम्स में बांटा और एक की-फ्रेम की सहायता से गूगल सर्च किया.

सर्च परिणाम में हमने पाया कि वायरल वीडियो को पब्लिक ऐप नामक एक वेबसाइट पर ‘merajwalikhan’ नामक एक यूजर के द्वारा डाला गया है जिसे अब तक लगभग 70 हजार लोगों ने देखा है. 

अब हमने उसी की-फ्रेम को अन्य कीवर्ड्स की सहायता से गूगल पर तलाशा पर हमें ज्यादा जानकारी नही मिल पाई. फिर हमने “पुलिस द्वारा संविदा पुलिस कर्मियों की पिटाई’ कीवर्ड के साथ उक्त की-फ्रेम को गूगल पर ढूँढा. पर इससे भी हमें ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई. फिर हमने “पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे संविदा पुलिस कर्मियों को पीटा” कीवर्ड के साथ गूगल सर्च किया जिसके बाद हमें इस वीडियो से संबंधित कई अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं।.

आज तक में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार झारखण्ड के रांची में पक्की नौकरी के लिए सहायक पुलिस कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन किया था जहां बवाल बढ़ने पर पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा. 

https://www.aajtak.in/india/jharkhand/story/jharkhand-police-lathi-charge-at-protesters-over-the-demand-of-the-regularisation-of-their-jobs-1131931-2020-09-19

आज तक की रिपोर्ट में वायरल वीडियो हमें नहीं मिल पाया था. वायरल वीडियो की तलाश में हमने एक बार फिर गूगल सर्च का सहारा लिया. इस बार हमने आज तक की रिपोर्ट के आधार पर “रांची पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सहायक पुलिसकर्मियों को पीटा” कीवर्ड की सहायता से गूगल सर्च किया. गूगल सर्च से प्राप्त परिणामों में हमे ना सिर्फ मामले की पूरी जानकारी मिली बल्कि वायरल वीडियो भी मिल गया.

नवभारत टाइम्स की इस रिपोर्ट में घटना के विवरण के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो भी प्रकाशित किया गया है. नवभारत टाइम्स ने घटना की जानकारी देते हुए लिखा है “झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में पिछले आठ दिन से आंदोलनरत 2200 से अधिक अनुबंध सहायक पुलिसकर्मी शुक्रवार को उग्र हो गए। अनुबंध सहायक पुलिसकर्मी बैरिकेटिंग तोड़कर राजभवन का घेराव करने के लिए आगे बढ़ने लगे। पुलिस वालों ने प्रदर्शनकारी अनुबंध सहायक पुलिस कर्मियों को रोकने के लिए लाठी चार्ज और आंशू गैस का प्रयोग किया। वहीं अनुबंध सहायक पुलिसकर्मी ने भी पथराव किया। दोनों ओर से हुई इस कार्रवाई में दर्जनों पुलिसकर्मी व सहायक पुलिसकर्मी घायल हो गए।”

https://navbharattimes.indiatimes.com/state/jharkhand/ranchi/protesters-contracted-assistant-policemen-became-furious-in-ranchi-broke-barricading-many-injured-in-lathicharge/videoshow/78188563.cms

इसके बाद हमें ‘The Lallantop’ द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट प्राप्त हुई जिसमे घटना के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है.

https://www.thelallantop.com/videos/lathi-charge-at-assistant-police-personnel-in-ranchi/

‘The Lallantop’ की ही एक अन्य रिपोर्ट में इस पूरे मामले पर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पक्ष भी प्रकाशित किया गया है. इस रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री ने मामले पर बोलते हुए कहा, “सहायक पुलिस के विषय में हमारी सोच सकारात्मक है. लाठी चार्ज क्यों हुआ मैंने देखा नहीं है. और मैं उनसे ये अनुरोध भी करूंगा की आप सभी लोग अपनी इस मांग को सरकार के समक्ष रख सकते हैं लेकिन किसी भी तरह की गैर कानूनी कदम उठायेंगे तो सरकार उस पर भी समझौता नहीं करेगी. वो अपनी बात सरकार के समक्ष रखें, सरकार उनकी बात सुनेगी.”

https://www.thelallantop.com/news/in-jharkhand-ranch-police-lathi-charge-after-clash-with-protesting-assistant-police-personnel/

इसके बाद हमें समाचार एजेंसी ANI द्वारा किया गया एक ट्वीट भी मिला जिसमे वायरल वीडियो भी मौजूद है. उक्त ट्वीट में भी ऊपर दी गई मीडिया रिपोर्ट्स से मिलता जुलता विवरण ही दिया गया है.

हमारी पड़ताल में यह सिद्ध होता है कि स्थायी पुलिस कर्मियों द्वारा संविदा पुलिस कर्मियों की पिटाई का यह मामला झारखण्ड के रांची का है जहां पक्की नौकरी की मांग के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे सहायक पुलिस कर्मियों को राज्य की पुलिस द्वारा बल पूर्वक रोकने का प्रयास किया गया.

Result: Misleading

Sources:

Aaj Tak: https://www.aajtak.in/india/jharkhand/story/jharkhand-police-lathi-charge-at-protesters-over-the-demand-of-the-regularisation-of-their-jobs-1131931-2020-09-19

The Lallantop: https://www.thelallantop.com/videos/lathi-charge-at-assistant-police-personnel-in-ranchi/

ANI: https://twitter.com/ANI/status/1306926464651022338

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बीजेपी कार्यकर्ताओं के आपसी झड़प का पुराना वीडियो गलत दावे के साथ सोशल मीडिया पर हुआ वायरल

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों की झड़प का एक वीडियो वायरल है। दावा है कि संसद में नए कृषि कानून के लागू होने के बाद हरियाणा में भाजपा नेता की पिटाई की गयी है।

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सोशल मीडिया पर कुछ लोगों की झड़प का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो शेयर करने वाले यूज़र का दावा है कि यह वीडियो हरियाणा का है जहां नए कृषि कानून के पास होने के बाद भाजपा नेता की पिटाई की जा रही है।

ट्वीट के आर्काइव लिंक को यहाँ देखा जा सकता है।

Fact Check / Verification

केंद्र सरकार द्वारा नया कृषि कानून लागू करने के बाद देश की राजनीति गर्मा गयी है। जहां एक तरफ सरकार इस कानून को किसानों के हित में बता रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष और कई किसान संगठन इस कानून को किसान विरोधी बता रहे हैं।

केंद्र सरकार का कहना है कि नए कृषि कानून से किसान अपनी फसल देश के किसी भी कोने में खुद बेच सकता है। इससे बिचौलियों का काम खत्म हो जायेगा। जिससे किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिल सकेगा। वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि इससे उनकी फसल का न्यूनतम विक्रय मूल्य ख़त्म हो जायेगा, जिसके बाद किसानों का शोषण बढ़ेगा। 

इसी कानून से नाराज़ किसानों के सैकड़ों संगठन सड़क पर उतर आये हैं, और देश के कोने-कोने में धरना प्रदर्शन कर केंद्र सरकार से इस कानून को वापस करने की मांग कर रहे हैं।

इसी बीच सोशल मीडिया पर एक भाजपा नेता की पिटाई का वीडियो वायरल हो रहा है। दावा किया गया है कि यह वीडियो हरियाणा से है, जहां नाराज़ किसानों ने भाजपा नेता की पिटाई कर दी।

वीडियो के साथ वायरल हो रहे दावे का सच जानने के लिए हमने अपनी पड़ताल आरम्भ की। सबसे पहले हमने वीडियो को कुछ कीफ्रेम्स में तोड़कर गूगल पर खोजना शुरू किया। लेकिन गूगल पर प्राप्त परिणामों से हमें वायरल वीडियो की कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई।

वीडियो की सही जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने कीफ्रेम्स के साथ कुछ संबंधित कीवर्ड्स की भी सहायता ली। जिसके बाद हमें वायरल वीडियो फेसबुक पर हाल ही में 18 सितंबर को किये गए एक पोस्ट में मिला। लेकिन यहाँ वीडियो किसी अन्य दावे के साथ शेयर किया गया है।

वायरल वीडियो की सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने गूगल पर बारीकी से खोजना शुरू किया। इस दौरान हमें उक्त वीडियो यूट्यूब पर KADAK नाम के एक चैनल पर मिला। जहां वायरल वीडियो को साल 2019 में अपलोड किया गया है।

यूट्यूब पर पोस्ट हुए इस वीडियो के कैप्शन में जानकारी दी गयी है कि अजमेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी प्रत्याशी भागीरथ चौधरी के समर्थन में गुरुवार को एक जनसभा आयोजित की गयी थी जिसके बाद पार्टी के नेता आपस में भिड़ गए।

यूट्यूब पर मिले इस वीडियो के बारे में अधिक जानकारी के लिए कुछ सम्बंधित कीवर्ड्स के माध्यम से गूगल खंगालना शुरू किया। जिसके बाद हमें india today की वेबसाइट पर साल 2019 में छपे एक लेख में वायरल वीडियो की पूरी जानकारी मिली।

लेख के मुताबिक यह घटना साल 2019 की है। जब अजमेर की लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी भगीरथ चौधरी के समर्थक उनका प्रचार कर रहे थे।

इसके अलावा घटना की जानकारी news18 द्वारा यूट्यूब पर अपलोड किये गए वीडियो में भी देखी जा सकती है।

Conclusion

वीडियो की पड़ताल में हमें पता चला कि वायरल हो रहा दावा गलत है। दरअसल यह वीडियो हाल का नहीं बल्कि साल 2019 का है। साथ ही इस वीडियो का हाल के कृषि कानून से कोई संबंध नहीं है,असल में यह वीडियो राजस्थान का है जहां लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के दो गुटों में विवाद हो गया था।


Result:Misleading

Our Sources

https://www.youtube.com/watch?v=DhRbxQ54zQs

https://www.youtube.com/watch?v=qwF16I3AOFE

https://www.indiatoday.in/elections/lok-sabha-2019/story/bjp-workers-clash-ajmer-masuda-rally-1500120-2019-04-12


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क्या यूपीएससी परीक्षा में मुस्लिम छात्रों को हिन्दुओं की अपेक्षा मिलते हैं अधिक मौके? सोशल मीडिया पर वायरल हुआ फेक दावा

यूपीएससी में हिंदू बच्चा 6 बार बैठ सकता है जबकि मुस्लिम बच्चा 9 बार। ऐसा ही एक दावा सोशल मीडिया पर वायरल है।

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क्या यूपीएससी परीक्षा में मुस्लिम उम्मीदवारों को मिलते हैं अधिक मौके?

WhatsApp पर एक मैसेज बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि UPSC में हिंदू बच्चा 6 बार बैठ सकता है जबकि मुस्लिम बच्चा 9 बार। ऐसा क्यों? बीतते हुए समय के साथ संकट बढ़ता जा रहा है स्वार्थ, राजनीति, जातिवाद और कायरता छोड़ आंखें खोलो हिंदुओं अन्यथा सर्वनाश से स्वयं परमात्मा भी तुम्हें नहीं बचा सकेगा।

हमारे आधिकारिक नंबर पर एक यूज़र द्वारा वायरल दावे की सत्यता जानने की अपील की गई थी।

UPSC में हिंदू बच्चा 6 बार बैठ सकता है जबकि मुस्लिम बच्चा 9 बार।

देखा जा सकता है कि ट्विटर पर भी यह दावा अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

वायरल दावे के आर्काइव वर्ज़न को यहां देखा जा सकता है। फेसबुक पर भी इस दावे को कई यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

क्या यूपीएससी परीक्षा में मुस्लिम उम्मीदवारों को मिलते हैं अधिक मौके?
क्या यूपीएससी परीक्षा में मुस्लिम उम्मीदवारों को मिलते हैं अधिक मौके?

Fact Check/Verification

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल शुरू किया। खोज को शुरु करते हुए सबसे पहले हमने Union Public Service Commission की आधिकारिक वेबसाइट को खंगाला। पड़ताल के दौरान हमारे हाथ यूपीएससी द्वारा सिविल सर्विसेज़ की प्रारंभिक परीक्षा के लिए जारी किया एक नोटिस लगा। इस नोटिस में उम्मीदवार की योग्यता, उम्र, आरक्षण और परीक्षा के विषयों के बारे में बताया गया है।

इस नोटिस में बताया गया है कि आईएएस, आईएफएस और आईपीएस बनने के लिए उम्मीदवारों का केवल भारत का नागरिक होना अनिवार्य है। इसमें कहीं भी किसी धर्म, जाति से कोई लेना-देना नहीं है।

मुस्लिम कैंडिडेट्स के लिए अधिक उम्र

नोटिफिकेशन के मुताबिक 21 से 32 वर्ष तक के लोग UPSC की परीक्षा दे सकते हैं। जबकि उम्र सीमा में छूट एससी/एसटी (SC/ST) कैंडिडेट्स को 5 साल और ओबीसी को 3 साल की छूट मिलती है। लेकिन इस नोटिफिकेशन में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं है कि मुस्लिम उम्मीदवारों को अलग से उम्र सीमा में छूट दी जाती है।

 

क्या यूपीएससी परीक्षा में मुस्लिम उम्मीदवारों को मिलते हैं अधिक मौके?

यूपीएससी में मुस्लिम कैंडिडेट्स को मौके

पड़ताल के दौरान मिले नोटिफिकेशन के मुताबिक, सामान्य श्रेणी (General Category) के लोगों को परीक्षा देने के लिए 6 मौके (Attempts) मिलते हैं। ओबीसी (OBC) कैंडिडेट्स को 9 मौके मिलते हैं। जबकि एससी/एसटी (SC/ST) कैंडिडेट्स के लिए परीक्षा देने यानि Attempt करने की कोई सीमा नहीं है। लेकिन नोटिफिकेशन में कहीं भी मुस्लिम उम्मीदवारों को परीक्षा के लिए अलग से अवसर मिलने की बात नहीं कही गई है।

क्या यूपीएससी परीक्षा में मुस्लिम उम्मीदवारों को मिलते हैं अधिक मौके?

Conclusion

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि यूपीएससी में मुस्लिम उम्मीदवारों को अतिरिक्त छूट मिलने वाला दावा फर्ज़ी है। पड़ताल में हमने पाया कि मुस्लिम उम्मीदवारों को भी उतने ही मौके मिलते हैं जितने बाकी लोगों को मिलते हैं।


Result: False


Our Sources

UPSC Website https://www.upsc.gov.in/sites/default/files/Notification-CSPE_2020_N_Engl.pdf


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