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दिल्ली दंगों की चार्जशीट में शामिल नहीं है सीताराम येचुरी और योगेंद्र यादव का नाम, कई मीडिया रिपोर्ट्स में किया गया फेक दावा

हिंदुस्तान टाइम्स ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर दावा किया कि दिल्ली दंगों की चार्जशीट में सीताराम येचुरी और योगेंद्र यादव का भी नाम शामिल।

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दिल्ली दंगों की चार्जशीट में नहीं शामिल है सीताराम येचुरी और योगेंद्र यादव का भी नाम।

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने हिंदुस्तान टाइम्स के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा अच्छा यह भी “Naughty” निकले। दरअसल इंग्लिश अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर दावा किया है कि दिल्ली दंगों की चार्जशीट में सीताराम येचुरी और योगेंद्र यादव का भी नाम शामिल है।  

इस ट्वीट को अब तक 8800 बार रिट्वीट किया गया है और 44,000 से ज्यादा लोगों ने इस ट्वीट को लाइक भी किया है।

No Title

अच्छा ये भी “Naughty” निकले!! https://t.co/DIIsZf5LGS

वायरल दावे के आर्काइव वर्ज़न को यहां देखा जा सकता है।

ट्विटर पर इस दावे को अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है जिसे यहां देखा जा सकता है।

फेसबुक पर भी इस दावे को अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

Fact Check/Verification

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल शुरू किया। खोज के दौरान हमें वायरल दावे से संबंधित कई माडिया रिपोर्ट्स मिली।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल को शुरू किया। खोज के दौरान हमें वायरल दावे से संबंधित कई माडिया रिपोर्ट्स मिली।

नवभारत टाइम्स, जनसत्ता और ABP News द्वारा प्रकाशित की गई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस साल फरवरी में हुए दिल्ली दंगों के मामले में पुलिस ने सीताराम येचुरी, योगेंद्र यादव, जयती घोष, अपूर्वानंद और राहुल रॉय के नाम सह-षड्यंत्रकर्ताओं के रूप में दर्ज किए हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ लोगों ने सीएए के विरोध में प्रदर्शनकारियों को किसी भी हद तक जाने को कहा।

नवभारत टाइम्स, जनसत्ता और ABP News द्वारा प्रकाशित की गई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस साल फरवरी में हुए दिल्ली दंगों के मामले में पुलिस ने सीताराम येचुरी, योगेंद्र यादव, जयती घोष, अपूर्वानंद और राहुल रॉय के नाम सह-षड्यंत्रकर्ताओं के रूप में दर्ज किए हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ लोगों ने सीएए के विरोध में प्रदर्शनकारियों को किसी भी हद तक जाने को कहा।
नवभारत टाइम्स, जनसत्ता और ABP News द्वारा प्रकाशित की गई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस साल फरवरी में हुए दिल्ली दंगों के मामले में पुलिस ने सीताराम येचुरी, योगेंद्र यादव, जयती घोष, अपूर्वानंद और राहुल रॉय के नाम सह-षड्यंत्रकर्ताओं के रूप में दर्ज किए हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ लोगों ने सीएए के विरोध में प्रदर्शनकारियों को किसी भी हद तक जाने को कहा।

नवभारत टाइम्स और ABP News के आर्काइव वर्ज़न को यहां और यहां देखा जा सकता है।    

अलग-अलग कीवर्ड्स की मदद से और अधिक गूगल खोजने पर हमें BBC और नवभारत टाइम्स द्वारा प्रकाशित की गई मीडिया रिपोर्ट मिली। इसके मुताबिक दिल्ली पुलिस ने उन सभी मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया जिसमें येचुरी और योगेंद्र यादव के खिलाफ चार्जशीट की बात की गई थी।

अलग-अलग कीवर्ड्स की मदद से और अधिक गूगल खोजने पर हमें BBC और नवभारत टाइम्स द्वारा प्रकाशित की गई मीडिया रिपोर्ट मिली। इसके मुताबिक दिल्ली पुलिस ने उन सभी मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया जिसमें येचुरी, योगेंद्र यादव के खिलाफ चार्जशीट की बात की गई थी।

दावे की तह तक जाने के लिए हमने ट्विटर को खंगालना शुरू किया। पड़ताल के दौरान हमें Delhi Police के आधिकारिक हैंडल से किया गया एक ट्वीट मिला। इसके मुताबिक दिल्ली पुलिस India Today द्वारा प्रकाशित की गई रिपोर्ट का खंडन करती है। दिल्ली दंगों में सीताराम येचुरी, योगेंद्र यादव और जयती घोष का नाम चार्जशीट में शामिल नहीं है।  

No Title

Delhi Police’s Rebuttal to the news published in India Today dated 12.09.2020 captionedDelhi riots: Police name Yechury, Yogendra Yadav, Jayanti Ghosh, in supplementary chargesheet .https://t.co/b6W7rdeWMw pic.twitter.com/RgPJI6FgYs

दिल्ली पुलिस ने अपने दूसरे ट्वीट में यह स्पष्ट किया है कि सीताराम येचुरी, योगेन्द्र यादव और जयति घोष को दिल्ली पुलिस द्वारा चार्जशीट में आरोपी नहीं ठहराया गया है।

No Title

It is clarified that Shri Sitaram Yechury, Shri Yogendra Yadav and Smt Jayati Ghosh have not been arraigned as accused in the supplementary chargesheet filed by Delhi Police.

खोज के दौरान हमें Press Trust of India द्वारा किया गया एक ट्वीट मिला। इस ट्वीट में बताया गया है कि इन सभी का नाम एक अभियुक्त के बयान में लिया गया है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि आरोप पत्र में इन सभी लोगों का नाम किसी अभियुक्त के तौर पर नहीं है।

No Title

Delhi riots chargesheet: Police say, “Names are part of disclosure statement of one of accused in connection with organising and addressing Anti-CAA protests. Disclosure statement truthfully recorded. A person is not arraigned as accused only on basis of disclosure statement.”

नीचे योगेंद्र यादव के ट्वीट को भी देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने बताया है कि मीडिया में प्रकाशित की गई खबर गलत है। चार्जशीट में मुझे सह-साजिशकर्ता के रूप में या आरोपी के रूप में शामिल नहीं किया गया है।

No Title

This is factually incorrect report, hope @PTI_News withdraws it.Supplementary chargesheet does NOT mention me as co-conspirator, or even as accused. One passing reference to me and Yechury, in an unauthenticated police statement (not admissible in court) by one accused. https://t.co/QurXmQdOr2

नीचे सीताराम येचुरी द्वारा किए गए ट्वीट को भी देखा जा सकता है। उन्होंने अपने ट्वीट में केंद्र पर निशाना साधा है।

No Title

Delhi Police is under the Centre and Home Ministry. Its illegitimate, illegal actions are a direct outcome of the politics of BJP’s top leadership. They are scared of legitimate peaceful protests by mainstream political parties & are misusing state power to target the Opposition https://t.co/8uGr4x1ylC

Conclusion

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि हिंदी मीडिया द्वारा दिल्ली दंगों को लेकर गलत खबर प्रकाशित की गई है। पड़ताल में हमने पाया कि दिल्ली दंगों की चार्जशीट में सीताराम येचुरी और योगेंद्र यादव का नाम शामिल नहीं है। आज तक, नवभारत टाम्स, जनसत्ता, ABP News द्वारा प्रकाशित की गई खबर फर्ज़ी है।   


Result: False


Our Sources

Navbharat Times https://navbharattimes.indiatimes.com/metro/delhi/crime/delhi-police-names-sitaram-yechury-yogendra-yadav-in-supplementary-charge-sheet-as-co-conspirators-in-delhi-riots-case/articleshow/78080833.cms

ABP https://www.abplive.com/news/india/delhi-riot-sitaram-yechury-yogendra-yadav-jayati-ghoshs-name-came-in-chargesheet-charged-with-conspiracy-1561580

BBC https://www.bbc.com/hindi/india-54132339

Navbharat Times https://navbharattimes.indiatimes.com/metro/delhi/other-news/sitaram-yechuri-yogendra-yadav-not-charged-in-delhi-riots-case-clarifies-police/articleshow/78084868.cms

Twitter https://twitter.com/DelhiPolice/status/1305003383443447808


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क्या लखनऊ में संविदा पुलिसकर्मियों की हुई जमकर पिटाई? रांची में हुए प्रदर्शन को गलत दावे के साथ किया गया शेयर।

उत्तर प्रदेश में संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि लखनऊ में स्थायी तौर पर नियुक्त पुलिस कर्मियों द्वारा संविदा पर नियुक्त पुलिस कर्मियों की पिटाई का मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया.

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शिवसेना नेता संजय राउत के नाम पर बने एक पैरोडी ट्विटर हैंडल तथा कई अन्य ने यह दावा किया कि लखनऊ में संविदा पर रखे गए पुलिस कर्मियों की स्थायी तौर पर नियुक्त पुलिस कर्मियों ने जमकर पिटाई कर दी.

ऐसे ही तमाम अन्य दावे यहां देखे जा सकते हैं.

फेसबुक पर भी इस दावे को कई लोगों ने शेयर किया है जिसे यहां देखा जा सकता है.

उत्तर प्रदेश में संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि लखनऊ में स्थायी तौर पर नियुक्त पुलिस कर्मियों द्वारा संविदा पर नियुक्त पुलिस कर्मियों की पिटाई का मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया. आमतौर पर पुलिस प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए बल प्रयोग करती है लेकिन प्रदर्शनरत अगर स्वयं पुलिसकर्मी हो तो ऐसे में मामला थोड़ा दिलचस्प हो जाता है और यही दिलचस्पी इस दावे को चर्चा का विषय बनाती है.

वीडियो का सच जानने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो को की- फ्रेम्स में बांटा और एक की-फ्रेम की सहायता से गूगल सर्च किया.

सर्च परिणाम में हमने पाया कि वायरल वीडियो को पब्लिक ऐप नामक एक वेबसाइट पर ‘merajwalikhan’ नामक एक यूजर के द्वारा डाला गया है जिसे अब तक लगभग 70 हजार लोगों ने देखा है. 

अब हमने उसी की-फ्रेम को अन्य कीवर्ड्स की सहायता से गूगल पर तलाशा पर हमें ज्यादा जानकारी नही मिल पाई. फिर हमने “पुलिस द्वारा संविदा पुलिस कर्मियों की पिटाई’ कीवर्ड के साथ उक्त की-फ्रेम को गूगल पर ढूँढा. पर इससे भी हमें ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई. फिर हमने “पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे संविदा पुलिस कर्मियों को पीटा” कीवर्ड के साथ गूगल सर्च किया जिसके बाद हमें इस वीडियो से संबंधित कई अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं।.

आज तक में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार झारखण्ड के रांची में पक्की नौकरी के लिए सहायक पुलिस कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन किया था जहां बवाल बढ़ने पर पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा. 

https://www.aajtak.in/india/jharkhand/story/jharkhand-police-lathi-charge-at-protesters-over-the-demand-of-the-regularisation-of-their-jobs-1131931-2020-09-19

आज तक की रिपोर्ट में वायरल वीडियो हमें नहीं मिल पाया था. वायरल वीडियो की तलाश में हमने एक बार फिर गूगल सर्च का सहारा लिया. इस बार हमने आज तक की रिपोर्ट के आधार पर “रांची पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सहायक पुलिसकर्मियों को पीटा” कीवर्ड की सहायता से गूगल सर्च किया. गूगल सर्च से प्राप्त परिणामों में हमे ना सिर्फ मामले की पूरी जानकारी मिली बल्कि वायरल वीडियो भी मिल गया.

नवभारत टाइम्स की इस रिपोर्ट में घटना के विवरण के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो भी प्रकाशित किया गया है. नवभारत टाइम्स ने घटना की जानकारी देते हुए लिखा है “झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में पिछले आठ दिन से आंदोलनरत 2200 से अधिक अनुबंध सहायक पुलिसकर्मी शुक्रवार को उग्र हो गए। अनुबंध सहायक पुलिसकर्मी बैरिकेटिंग तोड़कर राजभवन का घेराव करने के लिए आगे बढ़ने लगे। पुलिस वालों ने प्रदर्शनकारी अनुबंध सहायक पुलिस कर्मियों को रोकने के लिए लाठी चार्ज और आंशू गैस का प्रयोग किया। वहीं अनुबंध सहायक पुलिसकर्मी ने भी पथराव किया। दोनों ओर से हुई इस कार्रवाई में दर्जनों पुलिसकर्मी व सहायक पुलिसकर्मी घायल हो गए।”

https://navbharattimes.indiatimes.com/state/jharkhand/ranchi/protesters-contracted-assistant-policemen-became-furious-in-ranchi-broke-barricading-many-injured-in-lathicharge/videoshow/78188563.cms

इसके बाद हमें ‘The Lallantop’ द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट प्राप्त हुई जिसमे घटना के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है.

https://www.thelallantop.com/videos/lathi-charge-at-assistant-police-personnel-in-ranchi/

‘The Lallantop’ की ही एक अन्य रिपोर्ट में इस पूरे मामले पर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पक्ष भी प्रकाशित किया गया है. इस रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री ने मामले पर बोलते हुए कहा, “सहायक पुलिस के विषय में हमारी सोच सकारात्मक है. लाठी चार्ज क्यों हुआ मैंने देखा नहीं है. और मैं उनसे ये अनुरोध भी करूंगा की आप सभी लोग अपनी इस मांग को सरकार के समक्ष रख सकते हैं लेकिन किसी भी तरह की गैर कानूनी कदम उठायेंगे तो सरकार उस पर भी समझौता नहीं करेगी. वो अपनी बात सरकार के समक्ष रखें, सरकार उनकी बात सुनेगी.”

https://www.thelallantop.com/news/in-jharkhand-ranch-police-lathi-charge-after-clash-with-protesting-assistant-police-personnel/

इसके बाद हमें समाचार एजेंसी ANI द्वारा किया गया एक ट्वीट भी मिला जिसमे वायरल वीडियो भी मौजूद है. उक्त ट्वीट में भी ऊपर दी गई मीडिया रिपोर्ट्स से मिलता जुलता विवरण ही दिया गया है.

हमारी पड़ताल में यह सिद्ध होता है कि स्थायी पुलिस कर्मियों द्वारा संविदा पुलिस कर्मियों की पिटाई का यह मामला झारखण्ड के रांची का है जहां पक्की नौकरी की मांग के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे सहायक पुलिस कर्मियों को राज्य की पुलिस द्वारा बल पूर्वक रोकने का प्रयास किया गया.

Result: Misleading

Sources:

Aaj Tak: https://www.aajtak.in/india/jharkhand/story/jharkhand-police-lathi-charge-at-protesters-over-the-demand-of-the-regularisation-of-their-jobs-1131931-2020-09-19

The Lallantop: https://www.thelallantop.com/videos/lathi-charge-at-assistant-police-personnel-in-ranchi/

ANI: https://twitter.com/ANI/status/1306926464651022338

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बीजेपी कार्यकर्ताओं के आपसी झड़प का पुराना वीडियो गलत दावे के साथ सोशल मीडिया पर हुआ वायरल

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों की झड़प का एक वीडियो वायरल है। दावा है कि संसद में नए कृषि कानून के लागू होने के बाद हरियाणा में भाजपा नेता की पिटाई की गयी है।

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सोशल मीडिया पर कुछ लोगों की झड़प का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो शेयर करने वाले यूज़र का दावा है कि यह वीडियो हरियाणा का है जहां नए कृषि कानून के पास होने के बाद भाजपा नेता की पिटाई की जा रही है।

ट्वीट के आर्काइव लिंक को यहाँ देखा जा सकता है।

Fact Check / Verification

केंद्र सरकार द्वारा नया कृषि कानून लागू करने के बाद देश की राजनीति गर्मा गयी है। जहां एक तरफ सरकार इस कानून को किसानों के हित में बता रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष और कई किसान संगठन इस कानून को किसान विरोधी बता रहे हैं।

केंद्र सरकार का कहना है कि नए कृषि कानून से किसान अपनी फसल देश के किसी भी कोने में खुद बेच सकता है। इससे बिचौलियों का काम खत्म हो जायेगा। जिससे किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिल सकेगा। वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि इससे उनकी फसल का न्यूनतम विक्रय मूल्य ख़त्म हो जायेगा, जिसके बाद किसानों का शोषण बढ़ेगा। 

इसी कानून से नाराज़ किसानों के सैकड़ों संगठन सड़क पर उतर आये हैं, और देश के कोने-कोने में धरना प्रदर्शन कर केंद्र सरकार से इस कानून को वापस करने की मांग कर रहे हैं।

इसी बीच सोशल मीडिया पर एक भाजपा नेता की पिटाई का वीडियो वायरल हो रहा है। दावा किया गया है कि यह वीडियो हरियाणा से है, जहां नाराज़ किसानों ने भाजपा नेता की पिटाई कर दी।

वीडियो के साथ वायरल हो रहे दावे का सच जानने के लिए हमने अपनी पड़ताल आरम्भ की। सबसे पहले हमने वीडियो को कुछ कीफ्रेम्स में तोड़कर गूगल पर खोजना शुरू किया। लेकिन गूगल पर प्राप्त परिणामों से हमें वायरल वीडियो की कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई।

वीडियो की सही जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने कीफ्रेम्स के साथ कुछ संबंधित कीवर्ड्स की भी सहायता ली। जिसके बाद हमें वायरल वीडियो फेसबुक पर हाल ही में 18 सितंबर को किये गए एक पोस्ट में मिला। लेकिन यहाँ वीडियो किसी अन्य दावे के साथ शेयर किया गया है।

वायरल वीडियो की सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने गूगल पर बारीकी से खोजना शुरू किया। इस दौरान हमें उक्त वीडियो यूट्यूब पर KADAK नाम के एक चैनल पर मिला। जहां वायरल वीडियो को साल 2019 में अपलोड किया गया है।

यूट्यूब पर पोस्ट हुए इस वीडियो के कैप्शन में जानकारी दी गयी है कि अजमेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी प्रत्याशी भागीरथ चौधरी के समर्थन में गुरुवार को एक जनसभा आयोजित की गयी थी जिसके बाद पार्टी के नेता आपस में भिड़ गए।

यूट्यूब पर मिले इस वीडियो के बारे में अधिक जानकारी के लिए कुछ सम्बंधित कीवर्ड्स के माध्यम से गूगल खंगालना शुरू किया। जिसके बाद हमें india today की वेबसाइट पर साल 2019 में छपे एक लेख में वायरल वीडियो की पूरी जानकारी मिली।

लेख के मुताबिक यह घटना साल 2019 की है। जब अजमेर की लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी भगीरथ चौधरी के समर्थक उनका प्रचार कर रहे थे।

इसके अलावा घटना की जानकारी news18 द्वारा यूट्यूब पर अपलोड किये गए वीडियो में भी देखी जा सकती है।

Conclusion

वीडियो की पड़ताल में हमें पता चला कि वायरल हो रहा दावा गलत है। दरअसल यह वीडियो हाल का नहीं बल्कि साल 2019 का है। साथ ही इस वीडियो का हाल के कृषि कानून से कोई संबंध नहीं है,असल में यह वीडियो राजस्थान का है जहां लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के दो गुटों में विवाद हो गया था।


Result:Misleading

Our Sources

https://www.youtube.com/watch?v=DhRbxQ54zQs

https://www.youtube.com/watch?v=qwF16I3AOFE

https://www.indiatoday.in/elections/lok-sabha-2019/story/bjp-workers-clash-ajmer-masuda-rally-1500120-2019-04-12


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क्या यूपीएससी परीक्षा में मुस्लिम छात्रों को हिन्दुओं की अपेक्षा मिलते हैं अधिक मौके? सोशल मीडिया पर वायरल हुआ फेक दावा

यूपीएससी में हिंदू बच्चा 6 बार बैठ सकता है जबकि मुस्लिम बच्चा 9 बार। ऐसा ही एक दावा सोशल मीडिया पर वायरल है।

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क्या यूपीएससी परीक्षा में मुस्लिम उम्मीदवारों को मिलते हैं अधिक मौके?

WhatsApp पर एक मैसेज बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि UPSC में हिंदू बच्चा 6 बार बैठ सकता है जबकि मुस्लिम बच्चा 9 बार। ऐसा क्यों? बीतते हुए समय के साथ संकट बढ़ता जा रहा है स्वार्थ, राजनीति, जातिवाद और कायरता छोड़ आंखें खोलो हिंदुओं अन्यथा सर्वनाश से स्वयं परमात्मा भी तुम्हें नहीं बचा सकेगा।

हमारे आधिकारिक नंबर पर एक यूज़र द्वारा वायरल दावे की सत्यता जानने की अपील की गई थी।

UPSC में हिंदू बच्चा 6 बार बैठ सकता है जबकि मुस्लिम बच्चा 9 बार।

देखा जा सकता है कि ट्विटर पर भी यह दावा अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

वायरल दावे के आर्काइव वर्ज़न को यहां देखा जा सकता है। फेसबुक पर भी इस दावे को कई यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

क्या यूपीएससी परीक्षा में मुस्लिम उम्मीदवारों को मिलते हैं अधिक मौके?
क्या यूपीएससी परीक्षा में मुस्लिम उम्मीदवारों को मिलते हैं अधिक मौके?

Fact Check/Verification

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल शुरू किया। खोज को शुरु करते हुए सबसे पहले हमने Union Public Service Commission की आधिकारिक वेबसाइट को खंगाला। पड़ताल के दौरान हमारे हाथ यूपीएससी द्वारा सिविल सर्विसेज़ की प्रारंभिक परीक्षा के लिए जारी किया एक नोटिस लगा। इस नोटिस में उम्मीदवार की योग्यता, उम्र, आरक्षण और परीक्षा के विषयों के बारे में बताया गया है।

इस नोटिस में बताया गया है कि आईएएस, आईएफएस और आईपीएस बनने के लिए उम्मीदवारों का केवल भारत का नागरिक होना अनिवार्य है। इसमें कहीं भी किसी धर्म, जाति से कोई लेना-देना नहीं है।

मुस्लिम कैंडिडेट्स के लिए अधिक उम्र

नोटिफिकेशन के मुताबिक 21 से 32 वर्ष तक के लोग UPSC की परीक्षा दे सकते हैं। जबकि उम्र सीमा में छूट एससी/एसटी (SC/ST) कैंडिडेट्स को 5 साल और ओबीसी को 3 साल की छूट मिलती है। लेकिन इस नोटिफिकेशन में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं है कि मुस्लिम उम्मीदवारों को अलग से उम्र सीमा में छूट दी जाती है।

 

क्या यूपीएससी परीक्षा में मुस्लिम उम्मीदवारों को मिलते हैं अधिक मौके?

यूपीएससी में मुस्लिम कैंडिडेट्स को मौके

पड़ताल के दौरान मिले नोटिफिकेशन के मुताबिक, सामान्य श्रेणी (General Category) के लोगों को परीक्षा देने के लिए 6 मौके (Attempts) मिलते हैं। ओबीसी (OBC) कैंडिडेट्स को 9 मौके मिलते हैं। जबकि एससी/एसटी (SC/ST) कैंडिडेट्स के लिए परीक्षा देने यानि Attempt करने की कोई सीमा नहीं है। लेकिन नोटिफिकेशन में कहीं भी मुस्लिम उम्मीदवारों को परीक्षा के लिए अलग से अवसर मिलने की बात नहीं कही गई है।

क्या यूपीएससी परीक्षा में मुस्लिम उम्मीदवारों को मिलते हैं अधिक मौके?

Conclusion

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि यूपीएससी में मुस्लिम उम्मीदवारों को अतिरिक्त छूट मिलने वाला दावा फर्ज़ी है। पड़ताल में हमने पाया कि मुस्लिम उम्मीदवारों को भी उतने ही मौके मिलते हैं जितने बाकी लोगों को मिलते हैं।


Result: False


Our Sources

UPSC Website https://www.upsc.gov.in/sites/default/files/Notification-CSPE_2020_N_Engl.pdf


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