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दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए प्रोटेस्ट की पुरानी तस्वीर को फोटोशॉप करके सपा नेता ने सोशल मीडिया पर किया फेक दावा

सपा नेता द्वारा ट्विटर पर पुलिस प्रोटेस्ट की एक तस्वीर शेयर करते हुए दावा किया गया है कि पुलिस लोगों पर लाठी चार्ज नहीं करती। सरकार उन्हें ऐसा करने पर मजबूर करती है। यह दावा वायरल है।

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पुलिस लाठी चार्ज करती नही सरकार करवाती है।

ट्विटर पर सपा नेता दिग्विजय सिंह देव द्वारा पुलिस के जवानों की तस्वीर शेयर की गई है। तस्वीर में कुछ जवान अपने हाथों में एक पैम्फलेट पकड़े हुए नजर आ रहे हैं जहाँ लिखा गया है कि ‘ मासूमों पर लाठी चार्ज हमसे नहीं हो पायेगा।’ सोशल मीडिया पर उन्होंने दावा किया है कि पुलिस किसी पर लाठी नहीं चलाना चाहती लेकिन सरकार उनसे जबरन लाठी चार्ज करवाती है। गौरतलब है कि हाथरस मामले के बाद हुए प्रोटेस्ट में यूपी के अंदर कई बार पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा था जिसमें विभिन्न दलों के कई नेता चोटिल हो गए थे। यहाँ यह भी गौर किया जाना चाहिए कि दिग्विजय सिंह देव समाजवादी पार्टी की उत्तर प्रदेश यूनिट के पदाधिकारी हैं। उनके द्वारा किया गया ट्वीट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ट्वीट का आर्काइव यहाँ देखा जा सकता है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई अन्य दावों को यहाँ देखा जा सकता है।

फेसबुक पर भी यह दावा तेजी से शेयर किया जा रहा है।

SS

Fact Check/Verification

वायरल तस्वीर में दिख रहे पुलिस के जवानों के हाथ में पोस्टर देखकर कोई भी आम नागरिक आसानी से भरोसा कर सकता है कि हो सकता है इस तरह का कोई प्रदर्शन हुआ हो। लेकिन पुलिस द्वारा ऐसे प्रदर्शन का सच क्या है इसकी पड़ताल जरूरी थी लिहाजा तस्वीर को गूगल रिवर्स किया। इस दौरान वायरल दावे से सम्बंधित कई मीडिया रिपोर्ट्स प्राप्त हुई। लेकिन तस्वीरें पिछले साल यानि साल 2019 की हैं साथ ही दिल्ली से सम्बंधित हैं। मीडिया रिपोर्ट्स को देखने पर पता चला कि पुलिस जवानों के हाथ में दिख रहे पोस्टर में कुछ और ही लिखा गया है।

Ss

Economic times द्वारा नवम्बर साल 2019 में एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक तीस हजारी कोर्ट में वकीलों और पुलिस कर्मियों के बीच हुए विवाद के बाद पुलिस के जवानों ने धरना देकर न्याय की मांग की थी। धरने में शामिल पुलिस कर्मियों के हाथ में दिख रहे पोस्टर में लिखा गया है, ‘We want justice‘ . गौरतलब है कि तीस हजारी कोर्ट सहित दिल्ली के अलग-अलग न्यायालयों में वकीलों द्वारा मीडिया कर्मियों और पुलिस के साथ झड़प की गई थी। झड़प के बाद ITO स्थित पुलिस मुख्यालय के सामने धरने पर बैठे पुलिस कर्मियों के साथ उनके परिजन भी आ गए थे।

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के हवाले से Scroll ने भी इस खबर को प्रकाशित करते हुए रिपोर्ट में तस्वीर अपलोड की थी। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि दिल्ली पुलिस के जवान अपने हाथों में WE want Justice का बोर्ड पकड़े हुए हैं। इसी तस्वीर को फोटोशॉप के माध्यम से एडिट करते हुए सोशल मीडिया पर भ्रामक दावा किया गया है।

Conclusion

हमारी पड़ताल में यह बात साबित हो गई कि करीब साल भर पहले दिल्ली पुलिस द्वारा किये गए प्रदर्शन की तस्वीर को एडिट करते हुए सोशल मीडिया पर सपा नेता द्वारा फेक दावा किया गया है।

Result- Misleading

Sources

Scroll- https://scroll.in/article/942785/in-unprecedented-action-delhi-police-stage-protest-against-assault-by-lawyers

Economic Times- https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/hc-to-hear-in-feb-plea-for-action-against-police-officials-for-protesting-against-clash-with-lawyers/articleshow/71967976.cms?from=mdr

NDTV-https://khabar.ndtv.com/news/india/tis-hazari-case-congress-questioned-where-is-home-minister-amit-shah-2127688

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी की वर्षों पुरानी तस्वीर के साथ सोशल मीडिया पर किया गया भ्रामक दावा

सोशल मीडिया पर भ्रामक तस्वीरें या वीडियोज शेयर कर किसी नेता का मजाक बनाना कोई नयी बात नहीं है। इसी क्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 2 तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं हैं.

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Rahul Gandhi performed Namaz Fake

सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का मजाक उड़ाते हुए दावा किया गया कि वह मस्जिद में हाथ जोड़कर प्रार्थना और मंदिर में दुआ करने की मुद्रा में रहते हैं।

ये तस्वीरें साल 2018 से लेकर अब तक अलग-अलग यूजर्स के द्वारा शेयर की जाती रही हैं. इन तस्वीरों को शेयर करने वाले यूजर्स में भाजपा नेता प्रदीप सिंह वाघेला और ऋषि बागरी आदि शामिल हैं.


Fact Check / Verification

सोशल मीडिया पर भ्रामक तस्वीरें या वीडियोज शेयर कर किसी नेता का मजाक बनाना कोई नयी बात नहीं है। इसी क्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 2 तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं हैं. यूजर्स ने उनके विवेक पर सवाल उठाते हुए तस्वीरों को तेजी से शेयर किया है. पड़ताल के प्रथम चरण में हमने सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में से उस तस्वीर को चुना जिसमे राहुल गांधी मजार पर हाथ जोड़कर दुआ करते नजर आ रहे हैं.

राहुल गांधी की मजार पर हाथ जोड़कर दुआ करने वाली तस्वीर का सच

जब हमने इस तस्वीर को गूगल पर ढूंढा तो तमाम सर्च परिणामों के बीच पाया कि वायरल तस्वीर को कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी शेयर किया गया है.

Google search results

हमने पाया कि वायरल तस्वीर को 27 सितम्बर को ट्विटर पर शेयर करते हुए कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई ने लिखा था “Rahul Gandhi visits Dargah-e-Ala Hazrat in Bareilly.” गौरतलब है कि यूपी कांग्रेस ने वायरल तस्वीर के ही साथ ली गई एक दूसरी तस्वीर भी शेयर की है.

कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल द्वारा किये गए इस ट्वीट को देखने पर पता चला कि वायरल तस्वीर सही है और इसके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है.


राहुल गांधी द्वारा मंदिर में नमाज अदा करने की मुद्रा में पूजा करने वाली तस्वीर का सच

सोशल मीडिया पर वायरल दूसरी तस्वीर को गूगल पर सर्च किया। लेकिन हमें कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई. इसके बाद हमने तस्वीर में दिख रहे विवरण (तस्वीर में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया की उपस्थिति) के अनुसार “Rahul Gandhi Offers Prayer With Kamalnath And Jyotiraditya Scindia” कीवर्ड के साथ गूगल सर्च किया। इस दौरान हमें यह पता चला कि वायरल तस्वीर 2018 की है. इस विषय पर Deccan Herald द्वारा प्रकाशित एक लेख में वायरल तस्वीर का एक दूसरा हिस्सा भी प्रकाशित किया गया है। जिसमें उनके बगल में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया बैठे हुए देखे जा सकते हैं. Deccan Herald द्वारा प्रकाशित इस तस्वीर को गौर से देखने पर यह भी स्पष्ट हो जाता है कि इस तस्वीर में राहुल गांधी के साथ पूजा करवा रहे पंडित वही हैं जो वायरल तस्वीर में राहुल गांधी के साथ मौजूद हैं.

https://www.deccanherald.com/national/rahul-follows-grandmother-698120.html

इसके बाद हमें इसी तस्वीर को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा किया गया एक ट्वीट भी मिला. बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह ट्वीट तब किया था जब वह कांग्रेस में थे, सिंधिया फिलहाल भाजपा में हैं.

ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा शेयर की गई तस्वीरों को गौर से देखने पर यह पता चलता है कि राहुल गांधी मंदिर में नमाज नहीं पढ़ रहे थे बल्कि पूजा के दौरान होने वाली ‘आचमन’ नामक विधि का अनुपालन कर रहे थे. बता दें कि सिंधिया द्वारा शेयर की गई तस्वीर में पूजा करवा रहे आचार्य को लोटे से जल निकालते हुए तथा राहुल गांधी को जल पीते हुए भी देखा जा सकता है.

Photograph shared by Jyotiraditya Scindia

वायरल दावे की जटिलता को देखते हुए हमने उक्त पूजा कार्यक्रम का वीडियो ढूंढा. इसके लिए हमने सिंधिया के ट्वीट से ‘ग्वालियर के अचलेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी’ कीवर्ड के साथ गूगल और यूट्यूब सर्च किया. सर्च परिणामों से प्राप्त वीडियोज को देखने पर यह साफ़ हो जाता है कि राहुल गांधी ने मंदिर में नमाज नहीं पढ़ी थी बल्कि आचमन नामक विधि का पालन कर रहे थे जिसमे पूजा करवा रहे आचार्य द्वारा दिए गए जल को पीना होता है. बता दें कि सर्च परिणामों से प्राप्त किसी भी वीडियो में राहुल गांधी नमाज पढ़ते नजर नहीं आते हैं.

हमारी पड़ताल में यह बात साफ़ हो जाती है कि राहुल गांधी ने मंदिर में नमाज नहीं पढ़ा। उनकी मंदिर में पूजा अर्चना करने वाली तस्वीर गलत संदर्भ में शेयर की जा रही है.


Result: Misplaced Context

Sources: Jyotiraditya Scindia’s Tweet, YouTube video published by Congress


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हिमाचल प्रदेश की वीडियो क्लिप को कम्युनल एंगल देते हुए उत्तराखण्ड का बताकर सोशल मीडिया पर किया गया शेयर

ट्विटर पर 2 मिनट 20 सेकेण्ड की एक वीडियो वायरल हो रही है। इस वीडियो में कुछ लोग दूसरे लोगों का पत्थरों से रास्ता बंद कर रहे हैं। जबकि वीडियो में पीछे से किसी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि यह लोग हमारा रास्ता बंद कर रहे हैं और हमें जान से मारने की भी धमकी भी दे रहे हैं।

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ये वीडियो उत्तराखंड के टीहरी का है। यहां शांतिधूर्त समुदाय के लोगों ने गांव का रास्ता बंद करके गांव वालों को तलवार से काटने की धमकी दे रहे हैं। मुस्कुराइए आप हिंदुस्तान में हैं।

ट्विटर पर 2 मिनट 20 सेकेण्ड की एक वीडियो वायरल हो रही है। इस वीडियो में कुछ लोग दूसरे लोगों का पत्थरों से रास्ता बंद कर रहे हैं। वीडियो में पीछे से किसी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि यह लोग हमारा रास्ता बंद कर रहे हैं और हमें जान से मारने की भी धमकी भी दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि ये वीडियो उत्तराखंड के टिहरी का है। यहां शांतिधूर्त समुदाय के लोग गांव का रास्ता बंद करके गांव वालों को तलवार से काटने की धमकी दे रहे हैं। मुस्कुराइए आप हिंदुस्तान में हैं।

वायरल पोस्ट का आर्काइव वर्ज़न को यहां देखा सकता है।

नीचे देखा जा सकता है कि वायरल वीडियो को फेसबुक पर अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

हिमाचल की वीडियो को उत्तराखंड के टिहरी का बताकर किया जा रहा है शेयर

ये वीडियो उत्तरा खण्ड के tehri का है, यहाँ शांतिप्रिय समुदाय गाँव का रास्ता बंद करके गाँव वालों को तलवार से काट ने की धमकी दे रहे हैं , मुस्कुराईये आप हिंदुस्तान मे हैं।इन कुत्तों को जिन्दा जलाओ ये हमारी संस्कृति को नष्ट कर रहे हैं

Posted by Singh Birendra on Thursday, October 15, 2020

ये वीडियो उत्तरा खण्ड के tehri का है, यहाँ शांतिप्रिय समुदाय गाँव का रास्ता बंद करके गाँव वालों को तलवार से का ने की धमकी दे रहे हैं , मुस्कुराईये आप हिंदुस्तान मे हैं।

Posted by Rajpal Chhoker on Sunday, October 18, 2020

Fact Check/Verification

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल शुरू की। सबसे पहले वायरल वीडियो को ध्यान से सुना। 1 मिनट 1 सेकंड पर वीडियो बना रहे शख्स को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि मैं डीसी महोदय श्री हंसराज और एसपी चंबा से और जितने भी शासन-प्रशासन हैं उनसे निवेदन करना चाहता हूं कि हमारे परिवार की सुरक्षा की जाए। हमारा जो रास्ता रोका गया है उसे भी खोला जाए।

Google खंगालने पर हमें 15 अक्टूबर, 2020 को YouTube पर अपलोड की गई एक वीडियो मिली। इस वीडियो में बताया गया है कि हिमाचल प्रदेश के चंबा में मिनी शाहीनबाग रोड को ब्लॉक किया गया।

अब हमें शक हुआ कि यह वीडियो उत्तराखंड के टिहरी का नहीं है। वायरल वीडियो की तह तक जाने के लिए हमने एसपी चंबा (SP Chamba) से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि पुरानी सड़क को लेकर यह लोग लड़ रहे थे। इस मामले में शामिल दो-तीन परिवारों की आपस में नहीं बनती और इसलिए उन्होंने यह वीडियो बनाया था। इस मामले में शामिल सभी लोग मुस्लिम हैं और अब इस मामले का समाधान भी हो गया है।

Conclusion

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही वीडियो का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि यह वीडियो उत्तराखंड के टिहरी का नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश के चंबा का है। पड़ताल में हमने पाया कि वीडियो में नज़र आ रहे दोनों पक्ष के लोग एक ही समुदाय के हैं। लोगों को भ्रमित करने के लिए वीडियो को सांप्रदायिक रंग देकर शेयर किया जा रहा है।


Result: False


Our Sources

YouTube https://www.youtube.com/watch?v=jmNVpEdCiiI&t=6s

Phone Verification Himachal Police


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बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय की वर्षों पुरानी तस्वीर कोरोना काल से जोड़कर गलत दावे के साथ सोशल मीडिया पर हुई वायरल

सोशल मीडिया पर बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय की एक तस्वीर वायरल है। दावा किया गया है कि वे पश्चिम बंगाल यूनिट के बीजेपी नेता और कोरोना पॉजिटिव दिलीप घोष से अस्पताल में मिलने पहुंचे।

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सोशल मीडिया पर बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय की एक तस्वीर वायरल है। दावा किया गया है कि वे पश्चिम बंगाल यूनिट के बीजेपी नेता और कोविड पॉजिटिव दिलीप घोष से मिलने अस्पताल पहुंचे। दावे में कहा गया है कि कोरोना संक्रमित मरीजों से मिलने का कलेजा सिर्फ बीजेपी नेताओं में ही है।


एक तरफ जहाँ बिहार बिधानसभा चुनाव की सरगर्मियां अपने चरम पर हैं तो दूसरी तरफ आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक पार्टियां अपना वोट बैंक साधने में लगी हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर बीजेपी नेता द्वारा कोरोना से पीड़ित पश्चिम बंगाल के बीजेपी यूनिट अध्यक्ष से अस्पताल में मिलने की एक तस्वीर वायरल हो गई। दावा किया गया कि कैलाश विजयवर्गीय कोरोना मरीज से मिलने अस्पताल पहुँच गए। इस दावे को कई यूजर्स अलग-अलग तरीके से शेयर कर रहे हैं।

Fact Check/Verification

सोशल मीडिया पर बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय को लेकर किए जा रहे दावे की पड़ताल आरम्भ की। तस्वीर को देखने पर पता चलता है कि अस्पताल के कमरे में मौजूद किसी भी व्यक्ति के चेहरे पर मास्क नहीं लगा हुआ है। इससे इस तस्वीर के पुराना होने का अंदेशा हुआ। बताते चलें कि कोरोना महामारी के इस दौर में हर किसी को फेस मास्क पहनने की अनिवार्यता है। सबसे पहले तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज की मदद से खोजना शुरू किय। इस दौरान कुछ सोशल मीडिया रिपोर्ट्स मिलीं। लेकिन हर जगह तस्वीर के साथ वायरल दावा देखने को मिला।

SS


वायरल दावे का सच जानने के लिए क्लेम से मिलते जुलते कुछ कीवर्ड्स को गूगल पर सर्च करना शुरू किया। इस दौरान बांग्ला न्यूज़ लाइव नामक वेबसाइट पर प्रकाशित एक खबर मिली जो बांग्ला भाषा में थी। ट्रांसलेट करने पर पता चला कि इस वेबसाइट ने भी वायरल दावे के साथ तस्वीर को प्रकाशित किया है।

पड़ताल के दौरान कुछ कीवर्ड्स का प्रयोग करने पर kolkata24x7.com नामक वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख मिला। इस लेख को साल 2018 में प्रकाशित किया गया था। रिपोर्ट में वायरल तस्वीर को देखा जा सकता है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में दिलीप घोष की सर्जरी की गई थी। इसी दौरान कैलाश विजय वर्गीय उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे थे। खोज के दौरान DNA द्वारा प्राकशित किया गया एक लेख मिला। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में बीजेपी नेता दिलीप घोष को एक सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।

SS

बीजेपी नेता दिलीप घोष कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसको लेकर देश के तमाम मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट प्रकाशित की है। लेकिन सरकारी निर्देशों के तहत किसी भी कोरोना मरीज से इस तरह मिलने की इजाजत नहीं है।

SS

Conclusion

हमारी पड़ताल में यह साफ़ हो गया कि बीजेपी नेता की वायरल तस्वीर करीब 3 साल पुरानी है। इस तस्वीर को कोरोना से जोड़कर गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।

Result- Misleading

Sources

DNA-https://www.dnaindia.com/india/report-west-bengal-bjp-chief-dilip-ghosh-hospitalised-2577787

kolkata24x7.com-https://english.kolkata24x7.com/dilip-ghosh-likely-released-hospital.html/

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