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Fact Check

मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी का मुखौटा पहने भाजपा नेता की पिटाई का वीडियो बिहार चुनाव से जोड़कर किया गया शेयर

उक्त दावे को कांग्रेस की राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर सुजाता पॉल ने भी अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया है जिसे अब तक 2.2 मिलियन बार देखा जा चुका है, 40 हजार बार शेयर किया गया है तथा 28 हजार से ज्यादा लोगों ने इस वीडियो को पसंद किया है.

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Bihar BJP Leader Beaten

बिहार में चुनाव नज़दीक आते ही सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे वायरल होने लगे हैं। ऐसे में एक वीडियो काफी शेयर हो रहा है जिसके साथ दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी का मुखौटा पहने एक बीजेपी नेता जब बिहार में आयोजित एक जनसभा में पहुंचा तो जनता ने उसकी पिटाई कर दी।

उक्त दावा फेसबुक और ट्विटर पर भी खासा वायरल हो रहा है.

बता दें इस दावे को कांग्रेस की राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर सुजाता पॉल ने भी अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया है जिसे अब तक 2.2 मिलियन बार देखा जा चुका है, 40 हजार बार शेयर किया गया है तथा 28 हजार से ज्यादा लोगों ने इस वीडियो को पसंद किया है.

Claim made by Congress leader Sujata Paul

Fact Check/Verification

चुनावों में फेक न्यूज़ एक ऐसी समस्या बनकर उभरी है जिसके फैलाव को रोकने का कोई सरल और सुगम रास्ता अभी तक इजात नहीं किया जा सका है। नेताओं के साथ या नेताओं के द्वारा मारपीट के वाकये तो अक्सर ही हम सभी तक पहुंचते रहते हैं ऐसे में वायरल वीडियो को लेकर किये जा रहे दावे की संभावना पर कोई संदेह नहीं किया जा सकता। इन्ही संभावनाओं की सत्यता की पड़ताल के लिए हमने वायरल वीडियो को लेकर अपनी पड़ताल शुरू की।

वायरल वीडियो को ध्यान से देखने पर इस पर ‘Digiana News’ का लोगो दिखा जिसके बाद हमने ‘Digiana News’ कीवर्ड के साथ Google सर्च किया जहां हमें उक्त संस्था के सोशल मीडिया चैनल्स प्राप्त हुए.

Digiana News Logo

‘Digiana News’ का फेसबुक और ट्विटर अकाउंट खंगालने के बाद हमने वायरल वीडियो को संस्था के यूट्यूब चैनल पर भी ढूँढा लेकिन वहां भी हमें उक्त वीडियो नहीं मिल पाया.

YouTube channel of Digiana News

इसके बाद हमने “मोदी का मुखौटा लगाकर पहुंचा तो लोगो ने भगा दिया” कीवर्ड्स के इस्तेमाल से गूगल सर्च किया जहां हमें वायरल वीडियो IBC24 नामक एक यूट्यूब चैनल पर 2 अक्टूबर, 2020 को अपलोड किया हुआ मिला।

Google Search Results

वायरल वीडियो को देखने पर हमें पता चला कि यह वीडियो बिहार का ना होकर मध्य प्रदेश के इंदौर का है जहां 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी का मुखौटा पहने एक भाजपा नेता के साथ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने मारपीट की। यूट्यूब वीडियो में यह भी जानकारी दी गई है कि यह माल्यार्पण कार्यक्रम कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित किया गया था जिसमे एक भाजपा नेता प्रधानमंत्री मोदी का मुखौटा पहन कर पहुंचे और कांग्रेस कार्यकर्ता इस बात पर भड़क गए.

इसके बाद हमने उपरोक्त यूट्यूब वीडियो में दी गई जानकारी की सहायता से “Congress के कार्यक्रम में PM Modi का मुखौटा लगाकर पहुंचा BJP कार्यकर्ता” कीवर्ड को गूगल पर ढूंढा जिसके बाद हमें यही वीडियो नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर द्वारा प्रकाशित मिला।

Google Search results

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट में मामले का विवरण उक्त यूट्यूब वीडियो में दिए गए विवरण से हूबहू मिलता जुलता है.

दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर इंदौर के रीगल चौराहे पर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण का कार्यक्रम चल रहा था। उसी समय भाजपा कार्यकर्ता मोदी का मुखौटा लगाए महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुंचा। माल्यार्पण करने के बाद जैसी नीचे उतरा कांग्रेसियों ने उन्हें घेर लिया और नारेबाजी शुरू कर दी। नारेबाजी के बीच कुछ कांग्रेसियों ने मोदी मुखौटा पहने भाजपा नेता पर हमला भी किया।

दैनिक भास्कर ने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं द्वारा हाथापाई के शिकार भाजपा नेता का बयान प्रकाशित करते हुए लिखा है कि “हमले के शिकार हुए भाजपा नेता लक्ष्मीनारायण शर्मा का कहना है कि वे मोदी के वेश में कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। गांधी जी क्या केवल कांग्रेस के हैं। सबको उन्हें माला पहनाने का अधिकार है। मैं माला पहनाने आया तो कांग्रेसी बौखला गए और मारपीट पर उतारू हो गए। यह नैतिकता के खिलाफ है। कांग्रेसियों ने मेरे साथ गाली गलौज किया, मार-पीट की है। इन्होंने गांधी स्थल पर ही मारपीट की।”

Conclusion

हमारी पड़ताल में यह बात स्पष्ट हो जाती है कि वायरल वीडियो बिहार का नहीं इंदौर का है तथा जिस नेता के साथ हाथापाई की घटना हुई है वह बिहार के नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के एक स्थानीय भाजपा नेता हैं. इस प्रकार हमारी पड़ताल से यह साफ़ हो जाता है कि कांग्रेस नेत्री सुजाता पॉल ने झूठा दावा शेयर कर भ्रम फैलाने की कोशिश की.

Result: Misleading


Our Sources

YouTube video published by IBC24.

Media reports published by Dainik Bhaskar and Navbharat Times


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कांग्रेस नेता राहुल गांधी की वर्षों पुरानी तस्वीर के साथ सोशल मीडिया पर किया गया भ्रामक दावा

सोशल मीडिया पर भ्रामक तस्वीरें या वीडियोज शेयर कर किसी नेता का मजाक बनाना कोई नयी बात नहीं है। इसी क्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 2 तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं हैं.

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Rahul Gandhi performed Namaz Fake

सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का मजाक उड़ाते हुए दावा किया गया कि वह मस्जिद में हाथ जोड़कर प्रार्थना और मंदिर में दुआ करने की मुद्रा में रहते हैं।

ये तस्वीरें साल 2018 से लेकर अब तक अलग-अलग यूजर्स के द्वारा शेयर की जाती रही हैं. इन तस्वीरों को शेयर करने वाले यूजर्स में भाजपा नेता प्रदीप सिंह वाघेला और ऋषि बागरी आदि शामिल हैं.


Fact Check / Verification

सोशल मीडिया पर भ्रामक तस्वीरें या वीडियोज शेयर कर किसी नेता का मजाक बनाना कोई नयी बात नहीं है। इसी क्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 2 तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं हैं. यूजर्स ने उनके विवेक पर सवाल उठाते हुए तस्वीरों को तेजी से शेयर किया है. पड़ताल के प्रथम चरण में हमने सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में से उस तस्वीर को चुना जिसमे राहुल गांधी मजार पर हाथ जोड़कर दुआ करते नजर आ रहे हैं.

राहुल गांधी की मजार पर हाथ जोड़कर दुआ करने वाली तस्वीर का सच

जब हमने इस तस्वीर को गूगल पर ढूंढा तो तमाम सर्च परिणामों के बीच पाया कि वायरल तस्वीर को कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी शेयर किया गया है.

Google search results

हमने पाया कि वायरल तस्वीर को 27 सितम्बर को ट्विटर पर शेयर करते हुए कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई ने लिखा था “Rahul Gandhi visits Dargah-e-Ala Hazrat in Bareilly.” गौरतलब है कि यूपी कांग्रेस ने वायरल तस्वीर के ही साथ ली गई एक दूसरी तस्वीर भी शेयर की है.

कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल द्वारा किये गए इस ट्वीट को देखने पर पता चला कि वायरल तस्वीर सही है और इसके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है.


राहुल गांधी द्वारा मंदिर में नमाज अदा करने की मुद्रा में पूजा करने वाली तस्वीर का सच

सोशल मीडिया पर वायरल दूसरी तस्वीर को गूगल पर सर्च किया। लेकिन हमें कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई. इसके बाद हमने तस्वीर में दिख रहे विवरण (तस्वीर में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया की उपस्थिति) के अनुसार “Rahul Gandhi Offers Prayer With Kamalnath And Jyotiraditya Scindia” कीवर्ड के साथ गूगल सर्च किया। इस दौरान हमें यह पता चला कि वायरल तस्वीर 2018 की है. इस विषय पर Deccan Herald द्वारा प्रकाशित एक लेख में वायरल तस्वीर का एक दूसरा हिस्सा भी प्रकाशित किया गया है। जिसमें उनके बगल में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया बैठे हुए देखे जा सकते हैं. Deccan Herald द्वारा प्रकाशित इस तस्वीर को गौर से देखने पर यह भी स्पष्ट हो जाता है कि इस तस्वीर में राहुल गांधी के साथ पूजा करवा रहे पंडित वही हैं जो वायरल तस्वीर में राहुल गांधी के साथ मौजूद हैं.

https://www.deccanherald.com/national/rahul-follows-grandmother-698120.html

इसके बाद हमें इसी तस्वीर को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा किया गया एक ट्वीट भी मिला. बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह ट्वीट तब किया था जब वह कांग्रेस में थे, सिंधिया फिलहाल भाजपा में हैं.

ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा शेयर की गई तस्वीरों को गौर से देखने पर यह पता चलता है कि राहुल गांधी मंदिर में नमाज नहीं पढ़ रहे थे बल्कि पूजा के दौरान होने वाली ‘आचमन’ नामक विधि का अनुपालन कर रहे थे. बता दें कि सिंधिया द्वारा शेयर की गई तस्वीर में पूजा करवा रहे आचार्य को लोटे से जल निकालते हुए तथा राहुल गांधी को जल पीते हुए भी देखा जा सकता है.

Photograph shared by Jyotiraditya Scindia

वायरल दावे की जटिलता को देखते हुए हमने उक्त पूजा कार्यक्रम का वीडियो ढूंढा. इसके लिए हमने सिंधिया के ट्वीट से ‘ग्वालियर के अचलेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी’ कीवर्ड के साथ गूगल और यूट्यूब सर्च किया. सर्च परिणामों से प्राप्त वीडियोज को देखने पर यह साफ़ हो जाता है कि राहुल गांधी ने मंदिर में नमाज नहीं पढ़ी थी बल्कि आचमन नामक विधि का पालन कर रहे थे जिसमे पूजा करवा रहे आचार्य द्वारा दिए गए जल को पीना होता है. बता दें कि सर्च परिणामों से प्राप्त किसी भी वीडियो में राहुल गांधी नमाज पढ़ते नजर नहीं आते हैं.

हमारी पड़ताल में यह बात साफ़ हो जाती है कि राहुल गांधी ने मंदिर में नमाज नहीं पढ़ा। उनकी मंदिर में पूजा अर्चना करने वाली तस्वीर गलत संदर्भ में शेयर की जा रही है.


Result: Misplaced Context

Sources: Jyotiraditya Scindia’s Tweet, YouTube video published by Congress


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हिमाचल प्रदेश की वीडियो क्लिप को कम्युनल एंगल देते हुए उत्तराखण्ड का बताकर सोशल मीडिया पर किया गया शेयर

ट्विटर पर 2 मिनट 20 सेकेण्ड की एक वीडियो वायरल हो रही है। इस वीडियो में कुछ लोग दूसरे लोगों का पत्थरों से रास्ता बंद कर रहे हैं। जबकि वीडियो में पीछे से किसी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि यह लोग हमारा रास्ता बंद कर रहे हैं और हमें जान से मारने की भी धमकी भी दे रहे हैं।

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ये वीडियो उत्तराखंड के टीहरी का है। यहां शांतिधूर्त समुदाय के लोगों ने गांव का रास्ता बंद करके गांव वालों को तलवार से काटने की धमकी दे रहे हैं। मुस्कुराइए आप हिंदुस्तान में हैं।

ट्विटर पर 2 मिनट 20 सेकेण्ड की एक वीडियो वायरल हो रही है। इस वीडियो में कुछ लोग दूसरे लोगों का पत्थरों से रास्ता बंद कर रहे हैं। वीडियो में पीछे से किसी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि यह लोग हमारा रास्ता बंद कर रहे हैं और हमें जान से मारने की भी धमकी भी दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि ये वीडियो उत्तराखंड के टिहरी का है। यहां शांतिधूर्त समुदाय के लोग गांव का रास्ता बंद करके गांव वालों को तलवार से काटने की धमकी दे रहे हैं। मुस्कुराइए आप हिंदुस्तान में हैं।

वायरल पोस्ट का आर्काइव वर्ज़न को यहां देखा सकता है।

नीचे देखा जा सकता है कि वायरल वीडियो को फेसबुक पर अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

हिमाचल की वीडियो को उत्तराखंड के टिहरी का बताकर किया जा रहा है शेयर

Fact Check/Verification

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल शुरू की। सबसे पहले वायरल वीडियो को ध्यान से सुना। 1 मिनट 1 सेकंड पर वीडियो बना रहे शख्स को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि मैं डीसी महोदय श्री हंसराज और एसपी चंबा से और जितने भी शासन-प्रशासन हैं उनसे निवेदन करना चाहता हूं कि हमारे परिवार की सुरक्षा की जाए। हमारा जो रास्ता रोका गया है उसे भी खोला जाए।

Google खंगालने पर हमें 15 अक्टूबर, 2020 को YouTube पर अपलोड की गई एक वीडियो मिली। इस वीडियो में बताया गया है कि हिमाचल प्रदेश के चंबा में मिनी शाहीनबाग रोड को ब्लॉक किया गया।

अब हमें शक हुआ कि यह वीडियो उत्तराखंड के टिहरी का नहीं है। वायरल वीडियो की तह तक जाने के लिए हमने एसपी चंबा (SP Chamba) से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि पुरानी सड़क को लेकर यह लोग लड़ रहे थे। इस मामले में शामिल दो-तीन परिवारों की आपस में नहीं बनती और इसलिए उन्होंने यह वीडियो बनाया था। इस मामले में शामिल सभी लोग मुस्लिम हैं और अब इस मामले का समाधान भी हो गया है।

Conclusion

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही वीडियो का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि यह वीडियो उत्तराखंड के टिहरी का नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश के चंबा का है। पड़ताल में हमने पाया कि वीडियो में नज़र आ रहे दोनों पक्ष के लोग एक ही समुदाय के हैं। लोगों को भ्रमित करने के लिए वीडियो को सांप्रदायिक रंग देकर शेयर किया जा रहा है।


Result: False


Our Sources

YouTube https://www.youtube.com/watch?v=jmNVpEdCiiI&t=6s

Phone Verification Himachal Police


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बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय की वर्षों पुरानी तस्वीर कोरोना काल से जोड़कर गलत दावे के साथ सोशल मीडिया पर हुई वायरल

सोशल मीडिया पर बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय की एक तस्वीर वायरल है। दावा किया गया है कि वे पश्चिम बंगाल यूनिट के बीजेपी नेता और कोरोना पॉजिटिव दिलीप घोष से अस्पताल में मिलने पहुंचे।

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सोशल मीडिया पर बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय की एक तस्वीर वायरल है। दावा किया गया है कि वे पश्चिम बंगाल यूनिट के बीजेपी नेता और कोविड पॉजिटिव दिलीप घोष से मिलने अस्पताल पहुंचे। दावे में कहा गया है कि कोरोना संक्रमित मरीजों से मिलने का कलेजा सिर्फ बीजेपी नेताओं में ही है।


एक तरफ जहाँ बिहार बिधानसभा चुनाव की सरगर्मियां अपने चरम पर हैं तो दूसरी तरफ आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक पार्टियां अपना वोट बैंक साधने में लगी हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर बीजेपी नेता द्वारा कोरोना से पीड़ित पश्चिम बंगाल के बीजेपी यूनिट अध्यक्ष से अस्पताल में मिलने की एक तस्वीर वायरल हो गई। दावा किया गया कि कैलाश विजयवर्गीय कोरोना मरीज से मिलने अस्पताल पहुँच गए। इस दावे को कई यूजर्स अलग-अलग तरीके से शेयर कर रहे हैं।

Fact Check/Verification

सोशल मीडिया पर बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय को लेकर किए जा रहे दावे की पड़ताल आरम्भ की। तस्वीर को देखने पर पता चलता है कि अस्पताल के कमरे में मौजूद किसी भी व्यक्ति के चेहरे पर मास्क नहीं लगा हुआ है। इससे इस तस्वीर के पुराना होने का अंदेशा हुआ। बताते चलें कि कोरोना महामारी के इस दौर में हर किसी को फेस मास्क पहनने की अनिवार्यता है। सबसे पहले तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज की मदद से खोजना शुरू किय। इस दौरान कुछ सोशल मीडिया रिपोर्ट्स मिलीं। लेकिन हर जगह तस्वीर के साथ वायरल दावा देखने को मिला।

SS


वायरल दावे का सच जानने के लिए क्लेम से मिलते जुलते कुछ कीवर्ड्स को गूगल पर सर्च करना शुरू किया। इस दौरान बांग्ला न्यूज़ लाइव नामक वेबसाइट पर प्रकाशित एक खबर मिली जो बांग्ला भाषा में थी। ट्रांसलेट करने पर पता चला कि इस वेबसाइट ने भी वायरल दावे के साथ तस्वीर को प्रकाशित किया है।

पड़ताल के दौरान कुछ कीवर्ड्स का प्रयोग करने पर kolkata24x7.com नामक वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख मिला। इस लेख को साल 2018 में प्रकाशित किया गया था। रिपोर्ट में वायरल तस्वीर को देखा जा सकता है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में दिलीप घोष की सर्जरी की गई थी। इसी दौरान कैलाश विजय वर्गीय उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे थे। खोज के दौरान DNA द्वारा प्राकशित किया गया एक लेख मिला। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में बीजेपी नेता दिलीप घोष को एक सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।

SS

बीजेपी नेता दिलीप घोष कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसको लेकर देश के तमाम मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट प्रकाशित की है। लेकिन सरकारी निर्देशों के तहत किसी भी कोरोना मरीज से इस तरह मिलने की इजाजत नहीं है।

SS

Conclusion

हमारी पड़ताल में यह साफ़ हो गया कि बीजेपी नेता की वायरल तस्वीर करीब 3 साल पुरानी है। इस तस्वीर को कोरोना से जोड़कर गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।

Result- Misleading

Sources

DNA-https://www.dnaindia.com/india/report-west-bengal-bjp-chief-dilip-ghosh-hospitalised-2577787

kolkata24x7.com-https://english.kolkata24x7.com/dilip-ghosh-likely-released-hospital.html/

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